Category: गीत चतुर्वेदी

बोलने से पहले

बुद्धिमान लोगों की तरह बोलो नहीं तो ऐसा बोलो जिससे आभास हो कि तुम बुद्धिमान हो बोलने से पहले उन तलवारों के बारे में सोचो जो जीभों को लहर-लहर …

बोलते जाओ

उस आदमी के लिए जो अपनी क़ब्र मे ज़िंदा है तुम्हें विधायक का सम्मान करना था जिसके लिए ज़रूरी था झुकना तुम्हें हाथ पीछे बांध लेने थे और बताना …

बुरी लड़कियाँ, अच्छी लड़कियाँ

`मीट लोफ़´ के संगीत के लिए साँप पालने वाली लड़की साँप काटे से मरती है गले में खिलौना आला लगा डॉक्टर बनने का स्वांग करती लड़की ग़लत दवा की …

प्रेम कविता

आत्महत्या का बेहतरीन तरीक़ा होता है इच्छा की फ़िक्र किए बिना जीते चले जाना पाँच हज़ार वर्ष से ज़्यादा हो चुकी है मेरी आयु अदालत में अब तक लम्बित …

पोस्टमैन

’निर्वासन के दिनों में एक छोटे द्वीप पर नेरूदा के साथी के लिए अपने कमरे में लेटा पोस्टमैन है जो नेरूदा को पहुँचाता था डाक हालाँकि उन्हें गए अरसा …

सुब्हान अल्लाह

रात में हम ढेर सारे सपने देखते हैं सुबह उठकर हाथ-मुँह धोने से पहले ही भूल जाते हैं हमारे सपनों का क्या हुआ यह बात हमें ज्यादा परेशान नहीं …

सभ्यता के खड़ंजे पर

बॉब डिलन के गीतों के लिए और उस आदमी को तो मैं बिल्कुल नहीं जानता जो सिर पर बड़ा-सा पग्गड़ हाथों में कड़ों की पूरी बटालियन आठ उंगलियों में …

मुंबई नगरिया में मेरा ख़ानदान

पिता पचपन के हैं पैंसठ से ज़्यादा लगते हैं पच्चीस का भाई पैंतीस से कम का क्या इक्कीस का मैं तीस-बत्तीस का दिखता हूं माँ-भाभी भी बुढ़ौती की देहरी …

मालिक को ख़ुश करने के लिए किसी भी सीमा तक जाने वाला मानवीय दिमाग़ और

मालिक को ख़ुश करने के लिए किसी भी सीमा तक जाने वाला मानवीय दिमाग़ और अपनी नस्ल का शुरुआती जूता राजकुमारी महल के बाग़ में विचर रही थीं कि …

नश्तर

मराठी कवि स्व. भुजंग मेश्राम के लिए पीड़ाओं का विकेंद्रीकरण हो रहा है और दुख का निजीकरण दर्द सीने में होता है तो महसूस होता है दिमाग में दिमाग …

तस्वीर में आमिर ख़ान के साथ मेरा एक रिश्तेदार

बहुत ख़ुश लगा पड़ा था और यहाँ-वहाँ देखते थोड़ा गर्व भी अग़ल-बग़ल बैठे थे जो थोड़ा-थोड़ा कनखियों से झाँक लेते तो सामने वाला पूरा का पूरा झुक पड़ा था …

डेटलाइन पानीपत

वाटरलू पर लिखी गई हैं कई कविताएँ पानीपत पर भी लिखी गई होंगी कार्ल सैंडबर्ग ने तो एक कविता में घास से ढाँप दिया था युद्ध का मैदान यहाँ …

जिसके पीछे पड़े कुत्ते

उसके बाल बिखरे हुए थे, दाढ़ी झूल रही थी कपड़े गंदे थे, हाथ में थैली थी… उसके रूप का वर्णन कई बार कहानियों, कविताओं, लेखों, ऑफ़बीट ख़बरों में हो …

गैंग

अलग-अलग जगहों से आए कुछ लोगों का एक गैंग है इसमें पान टपरी पर खड़े शोहदे हैं, मंदिरों-मस्जिदों पर पेट पालते कुछ धर्मगुरु हैं, कुछ लेखक हैं, थोड़े अजीब-से …

उन लोगों के बारे में जिन्हें मैं नहीं जानता

मैं जागता हूँ देर तक कई बार सुबह तक कमरे में करता हूं चहलक़दमी फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है कोई …