Category: गरिमा मिश्रा

मेरे गाँव की सड़क

कहीं टूटती सी, कहीं फूटती सी, मेरे गाँव के बीच से गुज़रती ये टूटी-फूटी सड़क.. जानती है दास्ताँ, हर कच्चे-अधपक्के मकान की, हर खेत,हर खलिहान की… ये सड़क जानती …

चेहरा कोयले का…

कौशाम्बी की कपकपाती ठंडी में, कौड़ा तापते-तापते, एक ख्याल मन की गली से गुज़रा.. क्या ये लाल-लाल कोयले के टुकड़े,  आपस में बातें करते होंगे?  जलते-जलते अपने आखरी दम …

माँ

माना आज बसा ली है हमने अपनी इक छोटी सी दुनिया, पर चलते-फिरते लौट आता है मन किसी और सदी मैं… जब हमारी पूरी दुनिया हुआ करती थी तेरा …

तहखाना

कुछ दिन पहले, मस्तिष्क की देहलीज से चलते-चलते, जब पहुंचे तहखाने में अपने दिल के, पाया इक पोटली में बंद तेरी यादों को… कुछ यादें थीं जो इक कोने …