Category: दिव्या श्रीवास्तव

ओम पूरी जिन्दा हैं…

मेरे बाथरूम में एक अनोखा प्रयोग चल रहा है/ दरवाज़ा बन्द कर के/घण्टों बैठा रहता हूँ.. घुटन की साँस लिए/हर रोज़ सोचता हूँ “आज क्या मैं ईमानदार नहीं रहा …