Category: देवी नांगरानी

हिज्र में उसके जल रहे जैसे

हिज्र में उसके जल रहे जैसे प्राण तन से निकल रहे जैसे। जो भटकते रहे जवानी में वो कदम अब संभल रहे जैसे। मौसमों की तरह ये इन्सां भी …

हमने पाया तो बहुत कम है बहुत खोया है

हमने पाया तो बहुत कम है बहुत खोया है दिल हमारा लबे-दरिया पे बहुत रोया है. कुछ न कुछ टूटके जुड़ता है यहाँ तो यारो हमने टूटे हुए सपनों …

सोच को मेरी नई वो

सोच को मेरी नई वो इक रवानी दे गया मेरे शब्दों को महकती ख़ुशबयानी दे गया। कर दिया नीलाम उसने आज खुद अपना ज़मीर तोड़कर मेरा भरोसा बदगुमानी दे …

सोच की चट्टान पर बैठी रही

सोच की चट्टान पर बैठी रही जाल मखमल का वहीं बुनती रही। पत्थरों में थे मिले कल देवता आज बुत मंदिर के मैं छलती रही। कहने के काबिल न …

साथ चलते देखे हमने .

साथ चलते देखे हमने हादसों के क़ाफ़िले। राह में रिश्तों के मिलते रिश्वतों के क़ाफ़िले। साथियों नें साथ छोड़ा इसका मुझको ग़म नहीं साथ मेरे चल रहे हैं हौसलों …

सहरा भी गुलज़ार भी तो हैं

सहरा भी गुलज़ार भी तो हैं साथ गुलों के ख़ार भी तो हैं. मन को मोहे मस्ती, रौनक संग उनके आज़ार भी तो हैं. क्यों लगती है दुनिया दुशमन …

सबका मन अपना दुश्मन है

सबका मन अपना दुश्मन है सोचों की बाहम अनबन है ख़ुश्क मिजाज़ों से यूँ मिलना सन्नाटो का ज्यूँ मधुबन है जब दुख ही दुख का मद्दावा फिर क्या खुशियों …

शीशे के मेरे घर के हैं …

शीशे के मेरे घर के हैं दीवारो-दर सभी कैसे कहूँ के सँग नहीं आएगा कभी। क्यों ओट में खड़े हो यूँ, कच्ची दीवार के, मौका मिला है बचने का …

वो हवा शोख पत्ते उड़ा ले गई

वो हवा शोख पत्ते उड़ा ले गई शाख़े-गुल को भी आख़िर दग़ा दे गई। जिंदगी मेरी मुझसे ज़िया ले गई किसलिये मौत आकर सज़ा दे गई। शोखियाँ तो छुपाकर …

मैं तो साहिल पे आकर रहा डूबता

मैं तो साहिल पे आकर रहा डूबता दाग दिल पर लगा वो नहीं छूटता ग़म की कश्ती किनारे पे ले आई है खुशनुमा दिल सहारा है क्यों ढूँढता? चलके …

मेरा शुमार कर लिया

मेरा शुमार कर लिया नज़ारों में जाने क्यों लाकर खड़ा किया है सितारों में जाने क्यों? गुलशन में रहके ख़ार मिले मुझको इस क़दर अब तो खिज़ां लगे है …

भटके हैं तेरी याद में

भटके हैं तेरी याद में जाने कहाँ कहाँ। तेरी नज़र के सामने खोये कहाँ कहाँ। रिश्तों की डोर में बंधे जाते कहाँ कहाँ उलझन में राहतें कोई ढूंढे कहाँ …

धीरे धीरे शाम चली आई

धीरे धीरे शाम चली आई भीनी भीनी खुशबू छाई इन्द्रधनुषी रँग मेरे मन का मैं उसकी परछाई, छाई धीरे धीरे शाम चली आई॥ बूँद पडे बारिश की, सौंधी महक …

दोस्तों का है अजब ढब

दोस्तों का है अजब ढब, दोस्ती के नाम पर हो रही है दुश्मनी अब, दोस्ती के नाम पर। इक दिया मैंने जलाया, पर दिया उसने बुझा सिलसिला कैसा ये …

दिल ना माने कभी तो क्या कीजे

दिल ना माने कभी तो क्या कीजे दिल करे दिल्लगी तो क्या कीजे. सारे ग़म मेरे आस पास रहे रश्क़ करती ख़ुशी तो क्या कीजे. अपनी परछाई से वो …

दिल न मुझसे कभी ख़फा होता

दिल न मुझसे कभी ख़फा होता उसका माना, अगर कहा होता। यूँ न ख़ामोशियाँ सिसकतीं फिर दर्द गर दर्द की दवा होता। वो समझते ज़रूर दुख मेरा दर्द ने …

दिल को हम कब उदास करते हैं

दिल को हम कब उदास करते हैं आज भी उनकी आस करते हैं हमको ढूँढ़ो नहीं मकानों में हम दिलों में निवास करते हैं पहले खुद ही उदास रहते …

तेरी रहमतों में सहर नहीं

तेरी रहमतों में सहर नहीं मेरी बंदगी में असर नहीं? जिसकी रहे नेकी निहाँ कहीं कोई ऐसा बशर नहीं? जिसे धूप दुख की न छू सके कोई ऐसा दुनियाँ …

ठहराव ज़िन्दगी में दुबारा नहीं मिला

ठहराव ज़िन्दगी में दुबारा नहीं मिला जिसकी तलाश थी वो किनारा नहीं मिला वर्ना उतारते न समंदर में कश्तियाँ तूफ़ान आए जब भी इशारा नहीं मिला मेरी लड़खड़हाटों ने …

टूटे हुए उसूल थे, जिनका रहा गुमाँ

टूटे हुए उसूल थे, जिनका रहा गुमाँ ॥ दीवार दर को ना सही अहसास कोई पर दिल नाम का जो घर मेरा यादें बसी वहाँ॥ नश्तर चुभोके शब्द के, …

झूठ सच के बयान में रक्खा

झूठ सच के बयान में रक्खा बिक गया जो दुकान में रक्खा क्या निभाएगा प्यार वह जिसने ख़ुदपरस्ती को ध्यान में रक्खा ढूँढ़ते थे वजूद को अपने भूले हम, …