Category: दीप्ति नवल

तीन कवितायें

1. मैंने देखा है दूर कहीं पर्बतों के पेड़ों पर शाम जब चुपके से बसेरा कर ले और बकिरयों का झुंड लिए कोई चरवाहा कच्ची-कच्ची पगडंडियों से होकर पहाड़ …