Category: चंद्रभानु भारद्वाज

चल दिया कोई सपने दिखा प्यार के

चल दिया कोई सपने दिखा प्यार के; सूझता है न अब कुछ सिवा प्यार के। आह आंसू तड़प हिचकियाँ सिसकियाँ, दर्द बदले में केवल मिला प्यार के। क्यों न …

हो हवाओं में तुम सब दिशाओं में तुम

हो हवाओं में तुम सब दिशाओं में तुम; रम रहीं मेरे मन की गुफाओं में तुम। झांकता हूँ शरद रात्रि में जब गगन, दीखतीं चंद्रमा की कलाओं में तुम। …

तन के आँगन में वर्षा हुई प्यार की

तन के आँगन में वर्षा हुई प्यार की; मन में बहने लगी इक नदी प्यार की। चार पल ही बिताये कभी साथ में, लगता जी ली हो पूरी सदी …

ढह गए विश्वास टूटी आस्थाएं

ढह गए विश्वास टूटी आस्थाएं; दर्द बन कर रह गईं हैं प्रार्थनाएं। प्रश्नचिन्हों से घिरे हैं न्यायमंदिर, हाथ में कुरआन गीता हम उठाएं। दीप की जलती हुई लौ तो …

न जिसके बीच हो दीवार वह आँगन नहीं मिलता

न जिसके बीच हो दीवार वह आँगन नहीं मिलता; कहीं अब ज़िन्दगी नज़रों में अपनापन नहीं मिलता। जिसे हम ओढ़ कर कुछ देर अपने दुःख भुला देते, बुना हो …

बता कर कुछ न कुछ कमियाँ निगाहों से गिराता है

बता कर कुछ न कुछ कमियाँ निगाहों से गिराता है; ज़माना नेक नीयत पर भी अब ऊँगली उठाता है। समझता ख़ुद के काले कारनामों को बहुत उजला, हमारे साफ …

किसी वीरान में भटका हुआ राही किधर जाए

किसी वीरान में भटका हुआ राही किधर जाए; न कोई रास्ता सूझे न मंज़िल ही नज़र आए। बदन की चोट तो इंसान सह लेता सहजता से, लगे मन पर …

प्यार से और बढ़कर नशा कुछ नहीं

प्यार से और बढ़कर नशा कुछ नहीं; रोग ऐसा कि जिसकी दवा कुछ नहीं। जिस दिये को जलाकर रखा प्यार ने, उसको तूफान आँधी हवा कुछ नहीं। जान तक …

कोई सपना पलक पर बसा ही नहीं

जाने क्या हो गया है पता ही नहीं; कोई सपना पलक पर बसा ही नहीं। नापते हैं वो रिश्तों की गहराइयाँ, जिनकी आंखों में पानी बचा ही नहीं। उनको …

है ज़हर पर मानकर अमृत उसे पीना यहाँ

है ज़हर पर मानकर अमृत उसे पीना यहाँ; ज़िन्दगी को ज़िन्दगी की ही तरह जीना यहाँ। उन हवाओं को वसीयत सौंप दी है वक्त ने, जिनने खुलकर साँस लेने …

क्या पता वह वासना थी क्या पता वह प्यार था

ज़िन्दगी मचली उमंगों का उठा इक ज्वार था; क्या पता वह वासना थी क्या पता वह प्यार था। याद बस दिन का निकलना और ढलना रात का, कल्पनाओं के …

कभी तो ख्वाब सा लगता कभी लगती हकीक़त सी

कभी तो ख्वाब सा लगता कभी लगती हकीक़त सी; मिली है ज़िन्दगी इक क़र्ज़ में डूबी वसीयत सी. उसूलों के लिए जो जान देते थे कभी अपनी, वे खुद …

नदी को पार कर बैठा हुआ हूँ

नदी को पार कर बैठा हुआ हूँ; सभी कुछ हार कर बैठा हुआ हूँ. मिले बिन मान के ऐश्वर्य सारे, उन्हें इनकार कर बैठा हुआ हूँ. मना पाया न …

नए तेवर नया अंदाज़ रखन

नए तेवर नया अंदाज़ रखना; कहन सच्ची खरी आवाज़ रखना. भले ही पंख हों छोटे तुम्हारे, सदा ऊँची मगर परवाज़ रखना. कभी भूखा कभी प्यासा रखेगी, मगर इस ज़िन्दगी …

किसी के नाम से यदि ज़िन्दगी जुड़ी होती

बुझे दियों में भी इक बार रोशनी होती किसी के नाम से यदि ज़िन्दगी जुड़ी होती जहाँ पे धूप ही हरदम तपी रही सर पर वहाँ भी पाँव के …

दिशा आवाज़ देती है, दशा आवाज़ देती है

दिशा आवाज़ देती है दशा आवाज़ देती है व्यथा जब कुनमुनाती है कथा आवाज़ देती है छिटकते हैं अनोखे रंग सहसा कैनवासों पर मचलती कूँचियों को जब कला आवाज़ …

होंठ पर किलकारियों का नाम हो जैसे

होंठ पर किलकारियों का नाम हो जैसे ज़िन्दगी फुलवारियों का नाम हो जैसे मन भिगोया तन भिगोया आत्मा भीगी प्यार ही पिचकारियों का नाम हो जैसे आस के अंकुर …

ज़िन्दगी दुश्वारियों का नाम हो जैसे

फूस पर चिनगारियों का नाम हो जैसे ज़िन्दगी दुश्वारियों का नाम हो जैसे पेड़ अब होने लगा है छाँह के काबिल पर तने पर आरियों का नाम हो जैसे …

उजड़ती बस्तियों को फिर बसाना है बहुत मुश्किल

उजड़ती बस्तियों को फिर बसाना है बहुत मुश्किल बिलखती आँख में सपने सजाना है बहुत मुश्किल बहुत आसान आलीशान भवनों का बना लेना किसी दिल में जगह थोड़ी बनाना …

ईंट पत्थर का है घर को घर क्या कहें

ईंट पत्थर का है घर को घर क्या कहें इक अकेले सफ़र को सफ़र क्या कहें कोई आहट नहीं कोई दस्तक नहीं बिन प्रतीक्षा रहे दर को दर क्या …

कसकते हैं मगर इक आह भी भरने नहीं देता

कसकते हैं मगर इक आह भी भरने नहीं देता ज़माना घाव को भी घाव अब कहने नहीं देता महत्वाकांक्षाएं तो खड़ी हैं पंख फैलाए बिछाकर जाल बैठा जग उन्हें …

वो गुजरता है पागल हवा की तरह

राह में जिसकी जलते शमा की तरह वो गुजरता है पागल हवा की तरह छलछलाते हैं आँसू अगर आँख में पीते रहते हैं कड़वी दवा की तरह करना मुश्किल …

तमन्ना थी कि हम उनकी नज़र में खास बन जाते

तमन्ना थी कि हम उनकी नज़र में खास बन जाते कभी उनके लिए धरती कभी आकाश बन जाते अगर वे प्यास होते तो ह्रदय की तृप्ति बनते हम अगर …

हमें ऐ ज़िन्दगी तुझ से शिकायत भी नहीं कोई

वसीयत भी नहीं कोई विरासत भी नहीं कोई हमें ऐ ज़िन्दगी तुझ से शिकायत भी नहीं कोई रहा खुद पर भरोसा या रहा है सिर्फ ईश्वर पर सिवा इसके …

उनके माथे पर अक्सर पत्थर के दाग रहे

उनके माथे पर अक्सर पत्थर के दाग रहे जो इमली अमरूदों आमों वाले बाग़ रहे उन कदमों को पर्वत या सागर क्या रोकेंगे जिनकी आँखों में पानी सीने में …