Category: भारती शिवानी

बचपन

बचपन शब्द सुनते ही, याद आ जाता है माता पिता का प्यार दादा-दादी का दुलार वो नन्ही नन्ही अटखेलियां भाई-बहन के संग खिलौंनों को लेकर मस्तियाँ क्या सभी का …

ज़िन्दगी – 2

ज़िन्दगी की जदों-जहद, हमेशा चलती रहती है, खुशियाँ कम और दुःख ढेरों मिलते है, खुशियों के पलों को ढूंढना, एक बहुत बड़ी चनौती, बन जाती है, ग़मों के साथ …

दुनिया रंग- बिरंगी

ये दुनिया रंग- बिरंगी है, हर रंग बदलते देखा है, गिरगिट से जल्दी, इंसान बदलते देखा है, दुःख का बोझ, दुसरे पर डालकर, खुशियाँ अपने अंदर, समेटते देखा है, …

चमचागिरी आर्ट

चमचागिरी करना एक आर्ट है, होता इसमें कोई कोई सम्राट है, हंस कर अपना काम निकालना कुछ खिला-पिला के, बॉस को खुश रखना, कहाँ सबके बस की बात है, …

ईमानदारी

गंगा की लहरों में, मस्जिद की सीढ़ियों पे, आवाज़ दब जाती है, मंदिर के घंटो में, मस्जिद की आज़ान में, खोजते है मुआल्वी पंडित, भगवान अल्लाह के मानने वालों …

मुस्कुराती

आई एक छोटी सी बच्ची, मुस्कुराती हुई, इठलाती हुई, कपडे थे उसके गंदे, नाक बह रही थी, फिर भी उसकी मुस्कुराहट में, यह सब बातें छुप रही थी, माँगा …

बाबुल तेरा आंगन

एक छोटी नन्ही कली हूँ मैं, तेरे आंगन में खिली हूँ मैं, क्यूँ बाबुल तेरा आंगन छोड़ना पड़े, क्यूँ दूसरे आंगन को खिलाना पड़े, जब आती हूँ छम छम …