Category: भारती दास

ये मतवाला संसार

जाने किस दर्द-दंश से रोष दिखाता है समीर अंग-अंग को कम्पित करता तन में पहुंचाता है पीर. चौंक कर गिरते पीले पल्लव कलियों को देता झकझोर नीड़ के अन्दर …

बच्चे चाचा उन्हें बुलाते

इलाहाबाद में जन्म हुआ था थे कश्मीरी ब्राम्हण परिवार पिता मोतीलाल थे उनके स्वरुप रानी से मिला संस्कार. समय की गति के साथ-साथ बने यशस्वी और गुणवान स्वाधीनता संग्राम …

शरद सुंदरी अभिनन्दन है

हे शरद सुंदरी अभिनन्दन है तेरे सुन्दर अरुण चरण पर मृदुल कुसुम करता वंदन है. शरद सुंदरी अभिनन्दन है…. बीत गयी पावस की रातें सजल सघन घन की बरसातें …

श्रद्धा की अभिव्यक्ति है

आश्विन मास के कृष्ण-पक्ष में आरम्भ महालय का होता है पितरों को नमन करने का अनुपम अवसर ये होता है. जिनकी कृपा से तन-मन मिलता कृतज्ञ ये सारा जीवन …

रथ पर आये श्री भगवान

उष्ण-आद्र का सुखद मिलन है शांत हुई बूंदों से तपन है आकाश में बादल छाये हैं धरती की प्यास बुझाये हैं समस्त सृष्टि के पालनकर्ता अर्जुन के प्राण से …

धरा पर न रहे अँधेरा

दीपक से ज्योति जो बिखरती सौन्दर्य भरी होती अभिव्यक्ति अस्तित्व का द्योतक बन जाती गौरव-गरिमा को दर्शाती समवेत दीया का प्रकाशपूंज सद्भावों का बन जाता गूंज अंधकार की परतें …

गजल

दिल ने सोचा है कि इक बार मुलाकत होगी आपको फिर से नहीं कोई आघात होगी याद है मुझको हर वो पल,हुए थे दूर जब से हम आपकी याद …

पिता हमारे

आसमान में लाखों सितारे कैसे ढूंढें पिता हमारे ….. कभी नहीं दिखती है सूरत कहीं नहीं मिलती है मूरत रवि शशि उड़गण को निहारें कैसे ढूंढें पिता हमारे ….. …

हे योगी तेरी किन भावों को मानूँ

हे योगी तेरी किन भावों को मानूँ हर रूपों में तुम ही समाये, उन रूपों को पहचानूँ ,हे योगी ….. लघुता-जड़ता पशुता-हन्ता सब कर्मों के तुम ही नियंता उन …

नारी————— शक्ति

सृष्टि को रचती है नारी , गरिमा-मय गौरब सी नारी. करुणा-दया-ममता की मूरत, सुन्दरता की प्यारी सूरत. सद्विचार सदभाव से संपन्न, दोष –दुर्गुण का करे उन्मूलन . पत्नी -भगिनी-जननी …

पुष्प

वृक्ष के   ह्रदय  का ,आनंद होता पुष्प उल्लास अभिव्यक्ति का, आवाज होता पुष्प पवित्र भावनाओं का, प्रतीक होता पुष्प सुकोमल संवेदना का, चित्र होता पुष्प कहता है सुमन,  हे …

भ्रष्टाचार

अभी अचानक नहीं है निकला, मानव हिरदय को जिसने कुचला, विविध रूपधर भर धरती में, अवलोक रहा है वारम्बार, फ़ैल रहा  है भ्रष्टाचार | ज्ञान नहीं है,तर्क नहीं है, …

अस्थियों के बीच देवभूमि

  अस्थियों के बीच देवभूमि अस्थियों से हैं  घिरे केदार देव भूमि में हाहा-कार प्रकृति का यूँ कहर है बरपा असंख्य मौत में लोग है तड़पा हंसी-खुशी जो निकले …

सावित्री-सत्यवान कथा

सावित्री– सत्यवान की,  है  ये   कथा   पुरानी सदियों से बस सुनती आयी ,अनमिट प्रेम कहानी मद्र–देश के राजा अश्वपति थे, क्षमाशील संतान रहित थे प्रभास–क्षेत्र में भ्रमण को आये …

मेरी माँ

एहसास मुझको है अनेकों ,अनगिनत अनुभूतियाँ है  अनोखी  पुलक  भरी , ह्रदय  में  स्मृतियाँ स्नेहिल स्मरण से भरे हैं ,ये मेरे मन और प्राण हे माँ तुम्ही से है …