Category: अर्चना तिवारी

भले तू नहीं माँ..-अरुण कुमार तिवारी

‘माँ तेरे पावन रज कण को समर्पित.. ……………………….. भले तू नहीं माँ ,ये तेरी कहानी, वो सोने के रंग की ,तु परियों की रानी| वो ममता के आँचल का, …

काहे को श्रृंगार करुँ

काहे को श्रृंगार करुँ पिय काहे को श्रृंगार करुँ कंगना बदलू मन न लागे चूड़ी को क्यों हाथ धरु काहे को श्रृंगार करुँ पिय काहे को श्रृंगार करुँ झुमका …