Category: अनुपमा पाठक

निराश कविता में आस की पदचाप

हर वक़्त नहीं कर सकते हम आस की बातें, कभी कभी निराशा के सिवा कोई रंग ही नहीं बचता है ज़िन्दगी में! हमेशा नहीं हो सकती केवल चांदनी रातें, …

जीते जी हम क्यूँ, रोज मरते हैं

ईश्वर की लीला अपरम्पार है जो बह रही है कैसी अद्भुत धार है चेहरे पर मुस्कान लिए जीवन जय करते हैं हौसले की धूप खिली है और सरिता की …

जिस तरह प्रकृति में हवा बहती है

जिस तरह प्रकृति में हवा बहती है वैसे ही कवि के अंतर में कविता बहनी चाहिए! प्रेरणा से ही सृजन संभव है जब न लिख सकें तो कह सकें …

ज़िन्दगी दूर बहुत ले आई है घर से

यात्रा में हैं चल रहें हैं हम कभी खिली धूप कभी धरती नम ग़मगीन हुए कभी कभी यूँ ही हरसे क्या कहें ज़िन्दगी दूर बहुत ले आई है घर …

छोटे भाई के जन्मदिन पर

चलो आज नहीं तो कल ही सही… तुम्हारी कविताओं से मिलेंगे, ढेर सारा स्नेह और थोड़े से आँसुओं से मन आँगन सींचेंगे ! तब समय कहाँ था उन पन्नों को …

गंगा के इस पावन तट पर

आना सांसारिक प्रपंचों से बिलकुल निपट कर गंगा के इस पावन तट पर यहाँ की छटा है दिव्य सकल रश्मियाँ आँचल में आ गयी सिमट कर गंगा के इस …

कविता के आँगन में

हमेशा से अपनी रही होगी तभी तो इतनी जल्दी अपनी हो गयी, एक स्मृति… एक चमक… और फिर सारी वेदना खो गयी सुख दुःख की परिभाषाएं यहाँ भिन्न हैं, …

ऐसा हो…!!!

मान-अभिमान से परे रूठने-मनाने के सिलसिले-सा कुछ तो भावुक आकर्षण हो ! किनारे पर रेत से घर बनाता और अगले पल उसे तोड़-छोड़ आगे बढ़ता-सा भोला-भाला जीवन दर्शन हो! नमी …

इंसानियत का आत्मकथ्य

गुज़रती रही सदियाँ बीतते रहे पल आए कितने ही दलदल पर झेल सब कुछ अब तक अड़ी हूँ मैं ! अटल खड़ी हूँ मैं ! अट्टालिकाएँ करें अट्टहास गर्वित उनका हर …

आंसू चुनते किसी मोड़ पर मिलो कभी हमको

भूलना हो अगर अपना दर्द तो अपनाओ औरों के गम को! राह में तुम भी हो राह में हम भी हैं आंसू चुनते किसी मोड़ पर मिलो कभी हमको!! …

आँचल में उसके सिमटा है संसार

प्यार… बूँद ओस की स्निग्ध किरण सूरज की चमके जिससे सारा संसार धरा पर बोया बीज है प्यार! प्यार… मस्ती पवन की गति जीवन की जो है सबका आधार …