Category: अंशु मालवीय

हम तुमसे क्या उम्मीद करते

हम तुमसे क्या उम्मीद करते  …हम तुमसे क्या उम्मीद करते ब्राम्‍हण देव! तुमने तो खुद अपने शरीर के बाएं हिस्से को अछूत बना डाला बनाया पैरों को अछूत रंभाते …

..संतानें हत‌‍भागी

जब से भूख तुम्हारी जागी धरती बिकी बिकी धरती की संतानें हत‌भागी पांड़े कौन कुमति तोहे लागी ! धरती के भीतर का लोहा काढ़ा, हमने तार खिंचाए तार पे फटी …