Category: अमितु शर्मा

संयुक्त परिवार

फासले इतने बढे है दिलो मे आ गयी दरार भागदौड भरी जिंदगी मे टूट गये संयुक्त परिवार कित पाये संस्कार फूल अब दादी बाबा का उठ गया साया प्रेम …

” ओस सी बेटी “(हाइकू)

नन्ही,नाजुक निर्मल,काँपती-सी ओस की बूँद । केले के पात बिखरते ये मोती हँसती नार । हल्का-सा स्पर्श धुमिल – सा इत्र नारी चरित्र । सूर्य किरण मिटता ये अस्तित्व …

! ! कामधेनु! !

हे नर हैवान भक्षक तू उद्दण्ड पूत खोके कामधेनु करता तू व्यापार । ये गाय अमृत कामायनी रोगनाशनी महकता दर उज्ज्वल होगा घर । ये दूध शरीर मल-मूत्र उच्छ्वास …

अधूरा इन्साफ(पिरामिड)

हे देश कानून नाबालिग कुटिल बुद्धि वहशी दरिन्दे ना अपराध बोध। ये आखें समान अत्याचार एक-सा न्याय नही लिंग भेद ना अमीरी-गरीबी। ये उम्र महान न्याय गुम छूटते दोषी …

पिरामिड(आत्मबोध)

हे प्राण निष्ठुर आगमन विचित्र माया अद्वितीय कष्ट कलेषित है काया। ये मोह खण्डित छूटी बाधा आत्मसात तू जग प्रज्वलित परमात्मा लीन तू। दो चक्षु कपाट बुरा भला निर्णायक …