Category: अभिलाषा

माँ

कभी माँ का श्रिंगार थी ये चूड़िया उसके आने की आहट उसकी मुस्कराहट थी ये चूड़िया पर आज माँ के करुड़ रुदन पर टूटकर बिखरी है ये ऐसे मानों …