Category: युगल पाठक ‘विहंग’

खो गया है बचपन…

मेरी यह कविता आज के सामाजिक परिवेश मेँ बच्चोँ पर पढ़ाई व दिनचर्या से उत्पन्न दबाव के कारण उनके दिनोदिन खत्म होते बचपन पर आधारित है।मेरी यह कविता इस …

मैंने अपने स्वप्न को साकार होते देखा है……..

यह कविता मानव जीवन में घटित होने वाली घटनाओं के भय पर आधारित है। मैंने अपने स्वप्न को साकार होते देखा है, निराकार ब्रह्म को भी आकार होते देखा …

आज़ादी की दास्ताँ…….

आज़ादी की दास्ताँ……. क्या यही सोचकर वीरो तुमने हिँद वतन आज़ाद किया कि अपने ही लूटेँ हिँद धरा को अपने ही लूटेँ हिँद वतन अपनोँ के ही कदमोँ तले …