Category: यशवन्त माथुर

तेरी मंज़िल के पार!

चाहे -अनचाहे इस दुनिया मे आने के बाद अब धधक रहा है ज्वालामुखी ‘उनकी’ अपेक्षाओं का अरमानों का और मेरे अनगिने सपनों का वक़्त की बुलेट ट्रेन पर शुरू …