Category: यश मालवीय

मौसम हो गया फागुनी

सपने मैरून हुये शाम बैंजनी बोलते धुधलके में छुपी रोशनी कौंध रहे बादल की छांँव के बसेरे  बडा कठिन अपने से कोई मुंह फेरे  हर जुगनू में चमकी धूप …

गाए फगुआ कबीर

गाए फगुआ कबीर जागे सुलझे हैं सौ सवाल हर आहट है गुलाल गीत गुनगुनाने हैं पूजा का सजा थाल अच्छा है हालचाल ओढ़ें हैं  हवा शाल होंठ पर बहाने …