Category: वसीम बरेलवी

मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले

मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले किताब-ए-माज़ी  के औराक़ उलट के देख ज़रा न जाने कौन-सा सफ़्हा मुड़ा हुआ निकले जो देखने में …

रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे

रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे शम्अ से कहना के जलना छोड़ दे मुश्किलें तो हर सफ़र का हुस्न हैं, कैसे कोई राह चलना छोड़ दे तुझसे उम्मीदे- …

लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होता

लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होता हमारे दौर में आँसू ज़ुबाँ नहीं होता जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटायेगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता ये किस …

हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआ

हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआ आया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ उम्र भर तुझसे बिछड़ने की कसक ही न गयी , कौन कहता …

खुल के मिलने का सलीक़ा आपको आता नहीं

खुल के मिलने का सलीक़ा आपको आता नहीं और मेरे पास कोई चोर दरवाज़ा नहीं वो समझता था, उसे पाकर ही मैं रह जाऊंगा उसको मेरी प्यास की शिद्दत …

मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो

मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो के मैं ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारो वो बेख़याल मुसाफ़िर मैं रास्ता यारो कहाँ था बस में मेरे उस …

मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा

मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा ढलेगा दिन तो हर …

क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता

क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता तू छोड़ रहा है, तो ख़ता इसमें तेरी क्या हर शख्स …

क्या बताऊं कैसे ख़ुद को दर-ब-दर मैंने किया

क्या बताऊं कैसे ख़ुद को दर-ब-दर मैंने किया, उम्र भर किस-किस के हिस्से का सफ़र मैंने किया । तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इतनी शिद्दत1 के साथ, जिस …

कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी

कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी तुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी ऐसे रिश्ते का भरम रखना बहुत मुश्किल है तेरा होना भी नहीं और तेरा …

कही-सुनी पे बहुत एतबार करने लगे

कही-सुनी पे बहुत एतबार करने लगे मेरे ही लोग मुझे संगसार करने लगे पुराने लोगों के दिल भी हैं ख़ुशबुओं की तरह ज़रा किसी से मिले, एतबार करने लगे …

कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा

कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं …

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के …

अपने हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा

अपने हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा भी नहीं मैं गिरा …

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तस्सवुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो कि …