Category: विवेक सिंह

खामोशियाँ

साँसों की हौली सरसराहट, पेशानी पर शांत पसीने की चमक। दिमागी उधेड़बुन की ख़ामोशी रगों में खून की रवानी की धड़क।। कुछ खामोशियां, तो कुछ शोर ज़रूरी होते हैं …

क्या वफ़ा, क्या जफ़ा

मेरी याद्दाश्त पर इतना यकीन क्यों है तुझे, खुदगर्ज़ हूँ,अपना कहा भी भूल जाता हूँ।   कोई मजबूरी नही रोक सकती वादा निभाने से, बस यूँ है कि वादाखिलाफ …

डॉ. अवुल पकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम को एक श्रद्धांजलि

आज मैं हिंदी में ‘कलाम’ लिखता हूँ उर्दू आती नही पर दिल-से-सलाम लिखता हूँ I होती होगी आप जैसी ही कुरान की आयत इसीलिए पुरज़ोर और पुरशान लिखता हूँ …

हा !

जब जब इतिहास छुपाया जाता है, तब तब कोई गौरव मिटाया जाता है II जब मिथ्या के बल कुछ हथियाया जाता है, तब एक सत्य झुठलाया जाता है II …