Category: विवेक पाठक

हैं दोनो ही इंसान

मै मुसलिम हूँ, तू हिन्दू हैं ………..हैं दोनो इंसान ला मै तेरी गीता पढ लूँ , तू पढ ले मेरी कुरान ना मैने अपना अल्लाह देखा ना देखा तूने …

लिखू मै भी कुछ

लिखू मै भी कागज पर, जो हाथों की लकीर बन जाये गुन गुनाऊँ ऐसा तराना जो मेरी तकदीर बन जाये कलम की श्याही ख्वाव बने कागज की पट्टी विशबास …