Category: विवेक कुमार शर्मा

-दोहे- लिखने का प्रथम प्रयास

“ऐसे क्रोध संभालिए, जो गागर में नीर। कटु वचन मत बोलिए, चुभे ह्रदय में तीर।।” “जाकी छवि निहारन सो, मिले ह्रदय का चैन। वाको सम्मुख राखिए, दिन हो चाहे …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

इंसान कहाँ इंसान रहा (विवेक बिजनोरी)

“आज सोचता हूँ कि कैसा है इंसान हुआ, इंसान कहाँ इंसान रहा अब वो तो है हैवान हुआ कभी जिसको पूजा जाता था नारी शक्ति के रूप में, उसकी …

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की, ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान की लूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे, सबका पेट पालने वाले आत्महत्या …

मुफ़लिसी (विवेक बिजनोरी)

“गुलिस्तां -ऐ-जिंदगी में खुशबू सा बिखर के आया हूँ, हर एक तपिश पर थोड़ा निखर के आया हूँ इतना आसां कहाँ होगा मेरी हस्ती मिटा देना, मैं मुफ़लिसी के …

“काश” (विवेक बिजनोरी)

“काश कोई जुल्फों से पानी झटक के जगाता, काश कोई ऐसे हमको भी सताता काश कोई बतियाता हमसे भी घंटो, काश कोई होता जो तन्हाई मिटाता” काश कोई जुल्फों …

भूल गया (विवेक बिजनोरी)

“जबसे होश संभाला है खुशियों का जमाना भूल गया, इससे अच्छा पहले था अब हँसना हँसाना भूल गया। पहले ना थी चिंता कोई बेफिक्रा मैं फिरता था, अब अपनी …

क्या लिखूँ (विवेक बिजनोरी)

“सोचता हूँ क्या लिखूँ दिल ए बेकरार लिखूँ या खुद का पहला प्यार लिखूँ सावन की बौंछार लिखूँ या सैलाबो की मार लिखूँ खुशियों का वो ढ़ेर लिखूँ या …

अगर… (विवेक बिजनोरी)

“सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता, मगर पी लेता अगर तू शराब होती किताबों से मेरा तालुक़ नहीं रहा कबसे, मगर फुरसत से पढ़ता अगर तू किताब होती ख्वाब …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है, कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है” माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में, पापा …

हंगामा (विवेक बिजनोरी)

मैं खुद को उसके पहलू में छिपाता हूँ तो हंगामा, मैं कुछ पल साथ जो उसके बिताता हूँ तो हंगामा नहीं मालुम के कमबख्त जमाना चाहता क्या है, दर्द …