Category: विनय ‘भारत’

पडोसी को चेतावानी -एक छंद- कवि विनय भारत

सुधर सको तो सुधर जाओ वक्त बाकी हैं अब तक मान छोटा मिलती रही माफ़ी हैं फिर ना कहना बतलाया ना था पहले कभी परमाणु का परिक्षण अगला अभी …

कहाँ गए भैया-एक बहिन का दर्द – विनय भारत

कहाँ गए भैया तुम मुझे छोड़कर क्या तुम्हे पता हैं आज अकेली हूँ मैं इस राखी को देख देख कर रोती हूँ मैं लगता है भैया मुझे अभी अभी …

इस प्यार को क्या नाम दूँ – कवि विनय भारत

बिस्तर पर न नींद यहाँ चेहरे पे उदासी छायी हैं क्या नाम रखूं इस प्यार का बस लिखने की कलम उठाई हैं ए खुद तू ही बता ये प्यार …

मेरे देश की अशिक्षा – कवि विनय भारत

मुझे मेरे देश की अनपढ़ता का पता तब चला जब एक रेलवे स्टेशन पर विक्रेता से ग्राहक द्वारा बीडी का बंडल माँगा गया कवि विनय भारत

मंच सञ्चालन पर तालियों के लिए – कवि विनय भारत

दुःख सुख जिसके कभी साथ नहीं उस जीवन में कुछ खास नही वो महफिल भी क्या महफ़िल हैं जिसमे खुलते कभी हाथ नहीं कवि विनय भारत

मेरे देश की दुर्दशा ( मिलावट कहाँ कहाँ ) – कवि विनय भारत

मुझे मेरे देश की दुर्दशा का पता तब चला जब एक नोनवेज होटल के बाहर लिखा था यहाँ बकरे का “शुद्ध” मीट मिलता हैं हाय देश की दुर्दशा यहाँ …

ये झूमता सा सावन – कवि विनय भारत

ये खुशियों के पल ये मस्ती के मौसम ये झूमता सा सावन ये मदमस्त सी हवाएं ये मन में फुहारें ये चलती बहारें दे रही है खुशियाँ और शुभकामनाएं …

पिताजी – कवि विनय भारत

कभी वो मेरे पास आते हाल पूंछते गले लगाते कभी कभी अतिश्योक्ति कर मेरा जग को नाम बताते मैं पहले तो डरने लगता सोचने लगता कभी कभी जब मैं …

मेरे उपनामकरण पर कविता -विनय भारत

मेरे दोस्तों ने मुझसे पूंछा कि आप भारत क्यूँ लगाते हैं मैंने कहा – भारत में रहते हैं भारत की खाते हैं भारत लगाने में हमारा क्या जाता है …

प्याज पर बबाल – कवि विनय भारत

मेरे मित्र के घर इन्कम टैक्स का छापा पड गया मैंने मित्र से पूँछा यार तू कंगाल गरीब आदमी तेरे यहाँ छापा क्यूँ पड़ा तेरे पास काहे की सम्पत्ति …

हास्य कविता – पत्नी पर बातचीत कवि विनय भारत

एक राह में चलते चलते एक मीत मिला मैंने कहा वर्खुद्दार कहा जा रहे हो दौडे दौड़े वो बोल्या गुरूजी भैंस खो गयी है म्हारी मैंने कहा भाई हमारी …