Category: विनय ‘भारत’

दिल की गली में हलचलों का नाम आहटें…. vinay bharat sharma

दिल की गली में हलचलों का नाम आहटें दिल की गली का जब कोई दरवाजा खुलता है चितचोर कोई चोरी करने दिल में घुसता है आंखों के रस्ते सीधा …

फेसबुकिया -३ कवि विनय भारत

9 माता की गोद में जब जब पुत्र किसान के आंसू होंगे तब तब शेषनाग की सांसों के परवाने होंगे बेटे बेटे ही जब जब राजनीति का ताना बाना …

आई लव यू डियर हैप्पी न्यू ईयर ……………..(ओनली फोर अड्ल्ट एंड नोट फोर गर्ल)

चल मेरे मीत चल कहीं गुनगुनाएँ आजा आज हम एक दूजे के हो जाऐं आज हम 12 बजे प्रेम गीत गाऐं चल माय डियर न्यू ईयर मनाऐं न्यू ईयर …

मेरी शादी का कार्ड – ( हास्य व्यंग्य) विनय भारत के हसोड व्यंग्य

मेरी शादी का कार्ड – ( हास्य व्यंग्य) बुलाता हूँ मैं उन गणपति जी को जो करते हैं सभी का कल्‍याण! आयें गणपति हमारी इस शादी में, सभी देवों …

बोरियत जिन्दाबाद- (हास्य-व्यंग्य)-विनय भारत के हसोड व्यंग्य

बोरियत जिन्दाबाद- (हास्य-व्यंग्य) बोरियत ………… बोरियत………. बोरियत……….. कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि इस बोरियत नामक शब्‍द को जीरो से गुणा कर दूं। पर फिर सोचता हूं कि ये …

स्कूल बैग की व्यथा(हास्य व्यंग्य) विनय भारत का हास्य व्यंग्य

मैं हूँ बैग, आपने रोज मुझे सड़कों पर आते-जाते बच्‍चों के कंधों पर लटका देखा होगा। मेरी जिन्‍दगी की कहानी बड़ी दुखभरी हैं। मैं सुबह जल्‍दी उठता हूँ और …

(हास्य व्यंग्य) – ‘‘हम ईमान बेचते हैं”-विनय भारत के हसोड व्यंग्य

‘‘हम ईमान बेचते हैं” जी हाँ ,आपके कान गलत नहीं सुन रहे हैं यदि आपको विश्‍वास नहीं हैं तो आपकी कसम, हम वास्‍तव में बेचते हैं। क्‍या कहा… सुनाई …

फेल होने के फायदे-(हास्य व्यंग्य)-विनय भारत के हसोड व्यंग्य

हास्य व्यंग्य – फेल होने के फायदे फेल होना एक कला है, फेल होना कोई आसान काम थोडे ही है, फेल होने के लिए अपने मन को मनाना पड़ता …

‘‘वैशाख का सूरज” (हास्‍य व्‍यंग्‍य)- विनय भारत के हसोड व्यंग्य

‘‘वैशाख का सूरज” (हास्‍य व्‍यंग्‍य) गधा अर्थात्‌ वैशाखनंदन या यूं कहें तो वैशाख का चमकीला सूरज, ऋतुप्रेमी, सीधा साधा मूक सा जानवर। गधे की जितनी प्रशंसा करें उतना कम। …

एक कवि सम्मेलन में —– विनय भारत के हसोड व्यंग्य

एक कवि सम्मेलन में ( हास्य-व्यंग्य) हमारा कुलटा भाग्य कहें या सुलटा भाग्य कि हमें एक कवि सम्मेलन का स्नेह भरा आमंत्रण मिला। देखने में आमंत्रण कम किसी डाकू …

तेरे प्यार में मोटीयार कवि विनय भा र त

क्यूँ इस कदर हमसे नाराज़ होती हो क्यूँ हमे रुलाकर यार तुम सर्कार होती हो हम तो पहले से ही यार तुम्हारे थे तुम्हारे हैं हमे यूँ कसमे खिलाकर …

कुछ छोटी छोटी दिल से कविता-विनय भारत

तुझे छूकर हवा मेरे पास आई लगा जैसे तुम ही यूँ छूकर गए मुझे … …………………………………………………………… 2. तुझे मानना तो आता हैं मेरे दोस्त मुझे पर सोचता हूँ तुझे …

अतिथि स्वागत – कवि विनय भारत

फूलों से कर रहे हैं स्वागत हम तुम्हारा हमारे यहाँ पधारे अहसान है तुम्हारा आप यहाँ पधारे महकी हमारी बगिया आशीष से तुम्हारे कार्यक्रम सफल हमारा कवि विनय

अतिथि स्वागत-2 कवि विनय भारत

स्वागत में आपके हम मार्ग सजाने आए हाथों में हम हमारे फूलों की माला लाये विशिष्ट हो हमारे सम्माननीय तुम हो तुम्हारे स्वागतम में पलकें विछा के आए कवि …

मेरी आने बाली पीढ़ी के लिए एक कविता-कवि विनय भारत विनय

मेरे पुत्रों मेरे प्रपौत्रों मेरे आने बाली पीढ़ी के रिश्तेदारों और वे लोग जो जानते हैं मेरे बारे में थोडा कुछ उन सभी से कहता हूँ मैं मेरे जाने …

हास्य कविता- मरम्मत -कवि विनय भारत

एक पार्टी में वे बोली यार हम लड़कियां इतना फैशन करती हैं फिर भी साधारन ही दिखती हैं तुम लोग कुछ नही करते फिर भी हैंड्सम दीखते हो आखिर …

मिलना तेरा मेरा- कवि विनय भारत

देखता हूँ कि तुम मुझे चाहती तो हो मानता हूँ कहने से डरती भी हो तुम जानती हो शायद मैं करता हूँ लेकिन कहेंगे कब हम एक दूसरे से …

पडोसी को चेतावानी -एक छंद- कवि विनय भारत

सुधर सको तो सुधर जाओ वक्त बाकी हैं अब तक मान छोटा मिलती रही माफ़ी हैं फिर ना कहना बतलाया ना था पहले कभी परमाणु का परिक्षण अगला अभी …