Category: विमल सोलंकी

लोकतंत्र के तानाशाह

मैं व्याकुल हूं, मैं क्रोधित हूृं, जन जन की पीड़ा गाता हूं। वो तानाशाह बनकर बैठे, मैं लिखकर मन बहलाता हूं । जो माताऐं सीमाओं पर लाल सलोने खोती …