Category: विकाश प्रताप सिंह

एक हिंदी यथार्थवादी व्यंग्य

एक आम आदमी सुबह सुबह टीबी का रिमोट ओन करता है और समाचार सुनाता है की ”” कुछ चीजे सरकार ने सस्ती कर दी है करो में रियायतें कर …

न जाने कितने बेचारे

न जाने कितने बेचारे इस मैखाने में है कितनी कशिश इस पैमाने में है लब छूते पैमानों की हवस उतरती है जब सीने में ऐसा लगता है किसी दवाखाने …

हिंदुस्तान का सफर

मानवता को आधार बना कर नयन में स्वपनों को सजा कर करते हम गुणगान ये विश्व गुरु हिंदुस्तान है ये नयन सेज पर हो क्षितिज हमेशा पटेल , भगत …