Category: विजय कुमार सिंह

खत

मन की गहराइयों से यादों की पुरवाइयों में ठहरे हुए वक़्त की अनकटी तन्हाइयों में कोरे कागज़ पर दफ़न ख्वाबों की स्याही से बंद लिफाफे में पड़ा है उनकी …

बहू को पहनाई साड़ी, जीन्स सास ने धारी…

(जल्द आ रहा आपके बीच “भिखारी चालीसा”, पढना न भूलें. इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ) विजय कुमार सिंह vijaykumarsinghblog.wordpress.com