Category: वैभव विष्णुजी माणुसमारे

एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे

पानी तो रोज पीता हुँ मैँ… पर आज एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे, की उसने पानी को मेरे नाम कर दिया. . . सपने तो रोज देखता हुँ …

एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे

पानी तो रोज पीता हुँ मैँ… पर आज एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे, की उसने पानी को मेरे नाम कर दिया. . . सपने तो रोज देखता हुँ …