Category: उत्तम टेकरीवाल

:::  श्यामली  :::

डूबते सूर्य के आगे तुम्हारी उभरती छवि विस्तब्ध हैं नजारें जवान होता कवि यकायक पक्षियों के कलरव घरौंदों में सपनों के दिये जला दिए दिन भर की तपिश के …

:::  ले ले रे सेल्फी लेले रे :::

माँ की गोद में आशाओं की लोरी सुनना टेढ़े मेढे लकीरों से भविष्य की चादर बुनना कागज़ की पतंग से सितारों के फूल चुनना उंगली पकड़ कर बादशाहों सा …

::: लक्ष्मी का आगमन :::

क्यों आती हो तुम अमावस्या की रात जब चाँद तुम्हें इतना प्यारा है कैसे करें तुम्हारे दर्शन की आस चारों ओर अभी अंधियारा है कहते हैं कि उल्लू पर …

सुबह

अंधेरों के गर्भ में पलता उम्मीद का बीज सीप में छुपा मोती की तरह अपने बंधनों को तोड़ बाँहें फैला कर क्षितिज का सीना चीर गगन को लहूलुहान बना …

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल तेरी गोद में छोरों को चूसने की मिठास लोरी के सुरों से बढती सपनों की प्यास झरोखे में चाँद तारों की दुनिया …

अर्थ

यह खबर फैली थी चारों ओर देश की अर्थ व्यवस्था है कमजोर लोगों की आर्थिक स्थिति में गिरावट आई है इस कारण भयंकर मायूसी छाई है अर्थ संयोजन मनुष्य …

मैं खुश हूँ

मैं खुश हूँ अपेक्षाएं, आकांक्षाएं बड़ी हैं लाखों परेशानियां खड़ी हैं राह में बाँहें पसारे नाम लेकर मुझे पुकारे मैं खुश हूँ दूर रहूँ अरमानों के साये से वर्तमान …