Category: तीषु सिंह

इस दिवाली

इस दिवाली बैठती हूँ छत के मुँडेर पर देर तक, चंदा और तारों से गप्पें होती अक्सर, कभी तारे बताते अपनी कही-सुनी, तो कभी चंदा सुनाता अपनी कहानी, आज …

सुकून

अगर सुकून की शक्ल होती, अकेलेपन में खूब रोती , हर तरफ आवाज़ है और शोर है, कहीं पहुँचने की सबको होड़ है, मुझको भुला दिया है सब ने, …