Category: तेजेन्द्र शर्मा

सारों को पूजो

नज़र में जो हों, उन नज़ारों को पूजो कहीं चश्मों, नदियों, पहाड़ों को पूजो कभी पूजो गिरजे व मस्जिद शिवालय समाधी व रोज़ा, मज़ारों को पूजो कभी पूजो गर्मी, …

सहमे सहमे आप हैं

मस्जिदें ख़ामोश हैं, मंदिर सभी चुपचाप हैं कुछ डरे से वो भी हैं, और सहमें सहमें आप हैं वक्त है त्यौहार का, गलियाँ मगर सुनसान हैं धर्म और जाति …

रास्ते खामोश हैं

रास्ते ख़ामोश हैं और मंज़िलें चुपचाप हैं ज़िन्दगी मेरी का मकसद, सच कहूं तो आप हैं आपके आने से पहले चल रही थी ज़िन्दगी वो भला क्या ज़िन्दगी, जिसमें …

ये कैसा पंजाब हैं लोग

पढ़ने से जो समझ न आए ऐसी बनी किताब हैं लोग इज्ज़त जिससे नहीं झलकती अब ऐसा आदाब हैं लोग दूजे का नुक्सान करे जो ऐसा बने हिसाब हैं …

ये अचानक इसे हुआ क्या है

नाक ऊँची थी शहर की मेरे ये अचानक इसे हुआ क्या है? चेहरे पहचान में नहीं आते तुम ही बतलाओ माजरा क्या है? मर्ज़ का कुछ पता नहीं चलता …

मैं भी इन्सान हूँ

नज़र जो तुमने फेर ली, नहीं है कोई गिला मेरी वफ़ाओं का अच्छा दिया है तुमने सिला तुम्हें समझ सकूँ, ये बस में नहीं था मेरे मेरी नज़र का …

मेरे पासपोर्ट का रंग

मेरा पासपोर्ट नीले से लाल हो गया है मेरे व्यक्तित्व का एक हिस्सा जैसे कहीं खो गया है मेरी चमड़ी का रंग आज भी वही है मेरे सीने में …

मेरी मजबूर सी यादों को

ये जो तुम मुझको मुहब्बत में सज़ा देते हो मेरी ख़ामोश वफ़ाओं का सिला देते हो मेरे जीने की जो तुम मुझको दुआ देते हो फ़ासले लहरों के साहिल …

बहुत से गीत ख़्यालों में

बहुत से गीत ख्यालों में सो रहे थे मेरे तुम्हारे आने से जागे हैं, कसमसाए हैं जो नग़मे आजतक मैं गुनगुना न पाया था तुम्हारी बज़्म में ख़ातिर तुम्हारी …

प्रजा झुलसती है

महान कवि की महान रचना! महान रचना का कुंभीपाक नरक! कुंभीपाक नरक की अदृश्य अग्नि! अदृश्य अग्नि में जलता शैतान! तन कर खड़ा हुआ, देखा आकाश को भृकुटि तान, …

पुतला ग़लतियों का

ग़लतियाँ किये जाता हूं मैं हर वक़्त ग़लतियाँ ही ग़लतियाँ कोई सहता है, कोई होता है परेशान फिर भी मुझ पर करता है अहसान क्योंकि मैं बाज़ नहीं आता …

देखा है तुम्हें जब से

देखा है तुम्हें जब से मुझे चैन न आए तक़दीर बदल जाए जो तू मुझ को बुलाए आंखों में तेरी प्यार की ख़ुशबू का बसेरा मुस्कान तेरी करती है, …

तपते सहरा में जैसे

हवा में आज ये तुमसे जो मुलाकात हई तपते सहरा में जैसे प्यार की बरसात हुई पहली मुस्कान तेरी आज भी है याद मुझे ऐसा दिन निकला जिसकी फिर …