Category: तेग बहादुर

काहे रे बन खोजन जाई

काहे रे बन खोजन जाई। सरब-निवासी सदा अलेपा तोही संगि समाई ॥ पुहुप मध्य जिऊँ बासु बसतु है, मुकुर माहिं जैसे छाँईं। तैसे ही हरि बसे निरंतर, घट ही …