Category: तरुण भटनागर

अब्र का टुकड़ा रुपहला हो गया

अब्र का टुकड़ा रूपहला हो गया चाँदनी फूटेगी, पक्का हो गया इक ख़ता सरज़द हुई सरदार से दर-ब-दर सारा क़बीला हो गया धूप की ज़िद हो गई पूरी मगर …

सूरज के साथ साथ साथ

सूरजमुखी का खेत, सुबह से शाम तक, सूरज के साथ-साथ, अपना चेहरा घुमाता हुआ। वह शायद नहीं जानता, कि पूरी पृथ्वी भी, सूरज के सामने, हमेशा अपना चेहरा नहीं …

समुद्र किनारे शाम

पुलिन को धोने में, लहरों की हर वापसी के बाद, रेत पर चमचमाती परत, मानों- लकड़ी पर वानिर्श, इलेक्टरोप्लेटिंग साल्यूशन से हाल निकली सोने की प्लेट, रोने के बाद …

विरोध के तीन तरीके

उस रोज ध्यान से देखा था, चौराहे वाले फव्वारे को, क,ि ऊपर उछलना आैर हवा में बारीक बूंदों में बंटकर बहना, फव्वारे की नियती नहीं है, बल्िक पाइपों आैर …

पुराने अलबम की तस्वीरें

दूसरी चीजों की तरह, पुराना नहीं होता है, पुराना एलबम, वह जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, बदलते जाते हैं, उसमें चिपकी पुरानी ब्लैक एण्ड व्हाइट तस्वीरों के मायने। पुराने …

पहला मानसून

उसका इंतज़ार था। हमारी इच्छा, हमारा स्वार्थ, सो किया उसका इंतज़ार। पर हज़ारों मील दूर से, समुद्र की नम आर्द्र हवा, काले घने बादल, चक्रवात, घूमते बवण्डर, वह कभी …

ठंड का कारण

अगर – रक्त बफर बन जाता, हृदय रूक जाता हाइपोथर्मिया से, गल जातीं उंगलियाँ, अकड़कर, कड़कड़ा जाता पूरा शरीर, क्या तब भी, सूरज निर्दोष बरी हो जाता? अगर तेज़ …

गुलदस्ते में फूल

गुलदस्ते में, मुरझाने से पहले, चंद घण्टे जीते हैं, तने से कटे, एस्टर आैर कारनेशन के फूल। जैसे छिपकली की पंूछ, धड से अलग होने के बाद, फड़फड़ाती है, …