Category: स्वराज प्रसाद

वक़्त

कैसी दुनिया है यह , जहाँ कोई अपना नहीं, ना ही अपनापन होने का एहसास । सिर्फ कांच के कुछ टुकड़े हैं, जिन्हे जोड़ना आसान नहीं, फिर भी इन्ही …