Category: सुधाकर राजेन्द्र

वो सिक्कों से बेचते हैं

  वो  सिक्कों से  बेचते हैं  इमान  अपना हम  न रूपयों से बेचेंगे  दलान  अपना   माना कि पैसा कुछ है मगर सब कुछ नहीं मैं ना  सोने से  …

जब कलम को हथियार बनाया हमने

  जब कलम को हथियार बनाया हमने जीत कर समर में हर वार दिखाया हमने   हमें मारने को हरदम हथियार लिए फिरते हैं उन्हें मारने को यही समाचार …

उठा है वक्त के हाथों में

उठा है वक्त के हाथों में ख़ंजर देख रहा हूँ. जहां उगते थे गेहूं धान बंजर देख रहा हूँ.   जहां बहती थी नदियां कलकलाती दूध् सा पानी वहां …