Category: सोनित बोपचे

स्पर्धा २०१७ में प्रेषित कविता

“वो हिन्द का सपूत है” आप सभी के मार्गदर्शन के चलते मेरी कविता “वो हिन्द का सपूत है” को “स्पर्धा २०१७” प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है. कविता …

इन नजरों से देखो प्रियवर..पार क्षितिज के एक मिलन है

इन नजरों से देखो प्रियवर पार क्षितिज के एक मिलन है धरा गगन का प्यार भरा इक मनमोहक सा आलिंगन है.. पंछी गान करे सुर लय में नभ की …

“Poetry on Picture” contest के अंतर्गत सम्मिलित मेरी रचना “कचरेवाली” अगर आपको पसंद आए और आप उसे दूसरे लोगों से Share करने योग्य समझें तो दी गयी लिंक पर जाकर Share करें. विजेता Number of Facebook Shares के आधार पर चुना जाएगा.

20-01-2017 की  सन्ध्या ६ बजे तक किए गए Shares ही  गिने जाएंगे. “कचरेवाली”

कचरेवाली

इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. तहें टटोलती है उसकी.. जैसे गोताखोर कोई.. सागर की कोख टटोलता है.. उलटती है..पलटती है.. टूटे प्लास्टिक के टुकड़े …

चल अम्बर अम्बर हो लें..

चल अम्बर अम्बर हो लें.. धरती की छाती खोलें.. ख्वाबों के बीज निकालें.. इन उम्मीदों में बो लें.. सागर की सतही बोलो.. कब शांत रहा करती है.. हो नाव …

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो..

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. इस रिश्ते की बुनियाद हिलाने की शुरुआत तो मैंने की थी.. छुपकर तुमसे और किसी …

जश्न-ए-आजादी में “इन भारतीयों” को न भूलना…

यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में… मरते हैं लाखों..कफ़न सीते सीते… जरा गौर से उनके चेहरों को देखो… हँसते हैं कैसे जहर पीते पीते… वो अपने हक से मुखातिब …

वक़्त

वक़्त को दीवार पर टांग रखा है और जब देखता हूँ शक्ल उसकी जैसे कोई बेबस.. तिलमिलाता हुआ लाख मजबूरियाँ..पर जिंदगी बसर करता फिर रात के सन्नाटों में आकर …

अब सिर्फ एक तागा टूटेगा..

आज उस पुराने झूले को देखकर कुछ बातें याद आ गयी.. कई बरस गुजरे जब वो नया था.. उसकी रस्सियाँ चमकदार थी.. उनमे आकर्षण था.. उन रस्सियों का हर …

मैं किनारा हूँ…लहरों सा मचलते रहिए…

किसी गुल सा मेरे गुलशन में भी खिलते रहिए… कभी दो चार दिन में हमसे भी मिलते रहिए… तेरि अटखेलियों का मैं भी इक दिवाना हूँ… मैं किनारा हूँ…लहरों …