Category: श्यामगुप्त

भोले-वन्दना …डा श्याम गुप्त

भोले-वन्दना — सावन मास शिव-शम्भु का मॉस कहा जाता है प्रस्तुत है सावन मास में भोले वन्दना —- १. —-लयबद्ध षटपदी अगीत छंद में —- आदि-शंभु-अपरा संयोग से, महत्तत्व …

मधु कल्पना हो… गीत–डा श्याम गुप्त

मधु कल्पना हो… तुम ख्यालों की मेरी मधु कल्पना हो | तुम सवालों से सजी नव अल्पना हो || रंग तुम हो तूलिका के काव्य का हर अंग हो …

ब्रजभाषा व उसकी काव्य-यात्रा — डा श्याम गुप्त

ब्रजभाषा व उसकी काव्य-यात्रा — डा श्याम गुप्त विक्रम की 13वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी तक भारत के मध्यदेश की मुख्य साहित्यिक भाषा एवं साथ ही साथ समस्त …

डा श्याम गुप्त के अगीत—–

डा श्याम गुप्त के अगीत –अगीत अतुकांत कविता की एक धारा है जो ५ से १० पंक्तियों तक में रची जाती है |इसके विभिन्न छंद -अगीत छंद, लयबद्ध अगीत, …

डा श्याम गुप्त के त्रिपदा अगीत-

त्रिपदा अगीत- -१६-१६ मात्राओं के तीन पदों वाला अतुकान्त गीत है जो अगीत कविता-विधा का एक छंद है— १. .अंधेरों की परवाह कोई, न करे, दीप जलाता जाए; राह …

आठवीं रचना —लघु कथा— ड़ा श्याम गुप्त

आठवीं रचना —लघु कथा— ड़ा श्याम गुप्त कमलेश जी की यह आठवीं रचना थी | अब तक वे दो महाकाव्य, दो खंड काव्य व तीन काव्य संग्रह लिख चुके …

सुर असुर , आर्य-अनार्य व देवासुर संग्राम …डा श्याम गुप्त …

वेद और महाभारत के अनुसार आदिकाल में पृथ्वी पर – देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग आदि प्रमुख जातियां थीं । देवताओं को सुर तो दैत्यों को …

गीत … आखिर क्यों ये पुरवा आई…..ड़ा श्याम गुप्त

गीत … आखिर क्यों ये पुरवा आई….. मन की प्रीति पुरानी को, क्यों हवा दे गई ये पुरवाई | सुख की नींद व्यथा सोई थी, आखिर क्यों ये पुरवा …

आर्य नामकरण– ड़ा श्याम गुप्त

आर्य नामकरण अर्यमन या अर्यमा या अर्यमान प्राचीन हिन्दू धर्म के एक देवता हैं जिनका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। वे अदिति के तीसरे पुत्र हैं और आदित्य नामक …