Category: शुभम् श्रीवास्तव ‘ओम’

राजेन्द्र जी को श्रद्धान्जलि

एक सुबह सब कुछ मौन था। दूर कहीँ एक हल्की सी प्रश्नगूँज थी- “छोटे-छोटे ताजमहल’ का इस तरह अचनाक से ‘टूटना’?” ‘किनारे से किनारे तक’ निस्तब्धता मेँ गूँजती हर …

आज मेरे जनपद मेँ ‘कजरी’ है

प्रश्न नववधू का नवयौवना ननदी से -अनब्याही ननदी “कईसे..खेलई जाऽबू सावन मेँ कजरियाऽ.. होऽ…बदरियाऽ.. . घिर आये ननदी?” घिरते सावन मेँ आँगन मेँ वो जानी-पहचानी सी स्वर लहरी गूँज …

वो मेरा यार! मुझसे आज भी

सुनाया जख़्म-ए-दिल जिसको,वो कोई मसखरा निकला फरिश्ते की शकल मेँ वो,कोई ज़ानी बुरा निकला।। अराइश के पलोँ मेँ की मुहाजिर सोचकर खोटा, कभी फेँका था जिसको फिर वही सिक्का …

आखिरी अध्याय मेँ

आखिरी अध्याय मेँ,जब स्वास-गति घुटती रही। नियति चुपचाप,कल की पटकथा लिखती रही।। एक सोपानोँ से गिरता,कल सितारा फिर रूका, चाँदनी-आ जाओ प्रियतम! रात भर कहती रही।। एक पतीले से …

गुरू चरण-वंदना

अज्ञान-तिमिर,मन मेँ छाया, जब आप मिले,आलोक हुआ। सन्मार्ग मिला,सन्ताप मिटा, दुर्बल अन्तस् का,क्षोभ हुआ।। दूषित मानस मेँ ज्ञान-दीपिका, आप प्रज्जवलित करते है। करबद्ध आपकी,हे गुरूवर! हम चरण-वन्दना करते है।। …

फिकर एक पल नहीँ…..

फिक्र एक पल नहीँ कि- बीतते आसार बेहतर हो, तलबदारी कि-कल किस्मत का फिर किरदार बेहतर हो।। इसारत मेँ येही कोई,इज़ारदार कह बैठा, कि-सीरत छोड़िये सामान का इश्तेहार बेहतर …

भारत भावना दिवस पर

सुबह झोँकोँ मेँ इठलाती तीन रंगोँ की सुनहरी पट्टियाँ स्वर्णिम किरणावलियोँ मेँ दिन भर खेलती- मेरे पड़ोस मेँ। स्वतः तैर जाती होठोँ पर जन-गण-मन शीश झुक जाता स्वतः देशप्रेम …

वो मेरी उम्र का लड़का

वो मेरी उम्र का लड़का, कभी पढ़ने नहीं जाता, कभी कुछ लिख नहीं पाता; वो मेरी उम्र का लड़का!! १]-वो मेरी उम्र का लड़का- मेरी गली के सामने,बाज़ार का …

अभी ठहरे,हवाओँ का

अभी ठहरे,हवाओँ का,जरा रुख तो बदल जाये। उसे रोको,रूके वो आज,जाना हो तो कल जाये ॥ सुबह की बर्फबारी से,सङक तोढक चुकी होगी। पिघलते फर्श मे फँसकर,न देखो वो …

अभी माहौल भारी है

उससे कहूँगा आज- कल तक मेरे मुँडेर पर अक्सर जो आती रही है मीठे गीत गाती चूँ-चूँ करती एक चिड़िया! न जाने क्योँ? उसकी ये चहचहाट जानी-पहचानी सी लगती …