Category: शुभम प्रवीण पांडे

चाँदिनी में फिर भीगी हुई है रात।

चाँदिनी में फिर भीगी हुई है रात, उन्मुक्त गगन में ज्यादा निखरी हुई है रात, ख़ुशी में झूम रहे है इसके सरे चाहने वाले.. पेड़, पहाड़ नदियाँ और तालाब। …

रास्ता बना दिया है !

कुछ टूटे सपनो को बटोर कर हमने मील का पत्थर बना दिया, जूग्न्यूवो को इककटता कर कुछ रोशनी की, सन्नाटो मे आवाज़ भर झींगुरो को शांत किया समझाया उन …