Category: शिवेंद्र कुमार श्रीवास्तव

सपने

ये तारे जमीन पे चम्कते रहेन्गे आखो मे सपने सजते रअहेन्गे मौसम बहारो के खिलते रहेन्गे निगाहो मे हसरते पलते रहेन्गे पाना है सबको ये सपने सुनहरे सितारे बन के चमकते रहेन्गे.

मतदान

    देश की किस्म त का फैसला     अब हो रहा है आप देख रहे है चुनाव हो रहा है अपने देश मे यह पावन कार्य हो रहा है वादो की सुनहरी लहर है किस् किस को यह खबर है खबर है सबको यह चुनाव हो रहा है करना है मतदान यह सबको फिकर है देश का हर वोटर करेगा ये फिकर करना है मतदान चले बूथ पर देश  की किस्मत का फैसला अब हो रहा है आओ करे मतदान ये अपनी फिकर है.

किस्मत और कर्म

किस्मत ही कर्म कराती है यह अटल सत्य है जीवन का किन्तु  छोड कर्म किस्मत पर रोना यह भी कार्य नही है जीवन का

रचना

ळिखि कागज पर शब्दो को रचना नयी बनाता हू दिल से अपनी बात लिखू जो भाये सबके मन को ओ प्यारी बात मै यहा लिखू जो रचना होगी प्यारी सी  

जीवन

जिन्दगी एक सफर है कितनी सुहानी डगर है कही गाव है कही नगर है कभी अगर है कभी मगर है अगर अगर मे कटता सफर है जीता वही है जो जिन्दा जिगर है.  

फाफामऊ का गंगा तट

क्या तुमने देखा है, वह फाफामऊ का गंगा तट; सूरज सतरन्गी किरन विखेरता, मन्द पवन अठ्खेली करता; केवट जहा पर नाव खेवता, बसते जहा पर सहस्त्र देवता; हो जाये जहा पर जीव निश्कपट, क्या तुमने देखा है फाफामऊ का गन्गा तट; माता की वह गोद निराली, चुनरी बन फैली हरियाली; पुश्पाहार बेचते माली, उन्मुक्त जहा गन्गा मतवाली; मिलने को यमुना से सरपट. क्या तुमने देखा है, वह फाफामऊ का गन्गातट. मिलती जहा दूध कि धारा, सभी जीव पाते है चारा; कहे शिवेन्द्र गन्गा है सबकी जीवनधारा, राम-नाम जहा सत्य सहारा; मिट जाते जगत के कष्ट, क्या तुमने देखा है वह फाफामऊ का गन्गातट.

आज का मानव

आज का मानव कितना आगे है, विचारो कि चिन्ता कितना आगे है, आसमान मे प्लेन घूम रहे है, सागर मे शिप चल रहे है, जगत कम्प्युतर से चल रहे है. मानव कितना आगे है.