Category: शिवचरण दास

कभी भी किसी से नजर मत चुराना-गजल-शिवचरण दास

कभी भी किसी से नजर मत चुराना अगर हो सके तो सदा मुसकुराना . हैं अपने ही रंगीन सपनो मे खोये उन्हे बहुत हल्के से छूकर जगाना. गमों की …

जर्रा जर्रा ना बिखेरा-गजल-शिवचरण दास

जर्रा जर्रा ना बिखेरा तो मजा क्या है कोई मासूम ना घेरा तो सजा क्या है. सिर्फ इतनी सी ही है फरियाद हमारी या खुदा बतादे कि तेरी रजा …

वक्त नहीं चलता-शिवचरण दास

वक्त नहीं चलता इन्सान गुजरता है इन्सान समझता है वक्त गुजरता है. जितना भी चढे सूरज आकाश के सीने पर सुबहा निकलता है पर शाम को ढलता है. मेरा …

तुम्हारी खूबियां -गजल-शिवचरण दास

तुम्हारी खूबियां हमारी खामियां हैं फासले इतने अब हमारे दरमियां हैं. उस तरफ कालीन हैं ईरान के इस तरफ धूल भरी पगडंडिया हैं . उनकी हंसी भी हमारी मौत …

जिनकी आंखों मे पत्थर हैं

जिनकी आंखों में पत्थर हैं सच कैसे सह पायेगें उनके खुद के शीश महल हैं ये कैसे समझायेगें. चेहरे पर गहरी मायूसी नजरों में मक्कारी है कातिल हंसकर आते …

शैतान यूं शिकार पर-गजल-शिवचरण दास

शैतान यूं शिकार पर आयेगें बार बार चेहरे नये उधार के लायेगें बार बार. बहुत मासूम हैं कलियां बहल जायेगीं कसमें वो झूंठे प्यार की खायेगें बार बार. दिल …

कल की सूली पर-गजल-शिवचरण दास

कल की शूली पर खुशी है आज की अब कहां गुंजाईश भला फरियाद की. खामोशियों का दर्द पहचानता है कौन आजकल खातिर है बस आवाज की. चांदनी भी छानकर …

एक जमाने बाद-गजल-शिवचरण दास

वो सूनी महफिल में आया एक जमाने बाद पायलिया ने रंग जमाया एक जमाने बाद. आंख बचाकर सपने सारे दूर कहीं उड जाते थे अबकि मिलकर वो शरमाया एक …

हर मानव की यह राम कहानी-शिवचरण दास

युग युग से हर मानव की यह राम कहानी लगती है सबको अपने आंगन की छांव सुहानी लगती है. पेडो की डाली पर मचली नन्हीं जन्गली चिडिया भी दादी …

अपने फन का बडा उस्ताद-गजल-शिवचरण दास

अपने फन का बडा उस्ताद होता जा रहा है हर कोई बर्बाद वो आबाद होता जा रहा है. हर रात महंगी सुरा नोचता है बोटियां वो यहां इक खरा …

दर्द के अनुबन्ध सारे पक गये हैं-गजल-शिवचरण दास

दर्द के अनुबन्ध सारे पक गये हैं चलते चलते पग हमारे थक गये हैं. भीड थी कल साथ भारी शोरगुल आज सारे बादलों से छट गये हैं. नींद के …

याद के दीपक बुझाये-गजल-शिवचरण दास

याद के दीपक बुझाये चल दिये इस तरह नजरे झुकाये चल दिये. रोये तमाम उम्र आंख में आंसू नहीं गम छुपाये मुस्कुराये चल दिये. खाक कर देगी रुह को …

इस बस्ती में आग लगाई-गजल-शिवचरण दास

इस बस्ती में आग लगाई है गुमनाम मसीहा ने दिल में खूनी प्यास जगाई है गुमनाम मसीहा ने हाथ में माला आंख में खन्जर ओठों पर मोहक मुस्कान अबकी …

नई है सदी का सफर देखिये-गजल-शिवचरण दास

नई है सदी का सफर देखिये लहू को तरसती नजर देखिये. इरादे अपने अटल हैं मगर कहां टूटता है कहर देखिये. रिसालों में सबसे उपर छपेगी शहर मे है …

इस कदर इतिहास के पर्चे

इस कदर इतिहास के परचे बदलते जायेगें हर खरे इन्सान के चरचे बदलते जायेगें. अर्थ की कगार पर रिश्ते फिसलते जायेगें दिल बदलते जायेगें चेहरे बदलते जायेगें . कर्ज …

मेरा प्रिय जीव गधा

एक बार वाक प्रतियोगिता में मुझे विषय मिला मेरा प्रिय जीव. मैने सर को सहलाया और सादर फर्माया दुनिया भर का सताया हुआ सत्य मे अहिन्सा का धडा है …

उस दफ्तर क्या कहना

मक्खी मच्छर स्वागत गायें उस दफ्तर का क्या कहना अफसर सारे गाल बजायें उस दफ्तर का क्या कहना. मर गये कलम बस घिस घिसकर फाइल को अर्पित नैन किये …

मुठठी में बन्द -गजल-शिवचरण दास

मुठ्ठी में बन्द जितनी रोटियां हैं सत्ता की तुरप और गोटियां हैं. पानी हमारा खून सांस उनकी हवा उनका मुहं है और हमारी बोटियां हैं फर्शी सलाम करते है …

वैशाखियों से पांव की फरियाद

वैशाखियों से पांव की फरियाद करते रह गये दलदलों से राह का आह्वान करते रह गये. प्रपंच की भाषा बहुत सम्पन्न भाषा बन गई जिन्दगी भर व्यर्थ ही अनुवाद …

मन को इतना अधिक रूलाया-शिवचरण दास

मन को इतना अधिक रुलाया तन का दरिया सूख गया जिस दर्पण में चेहरा देखा वो दर्पण ही टूट गया. बून्द बून्द से भरा सरोवर और सरिताओं से सागर …