Category: शिव कुमार सिंह

कांटे चुभती है लहू के बौछार होते है

कभी कभी जब हम उदास होते है आँखों रोती है दिलों में कुछ बात होते है एक हसीं दुनिया है ये या जालिमों का आशियाना कोई डूब जाता है …

दर्द से भरी है ये दुनिया अब

आँखों में एक अरमान लिए फिरते है  होंठों पे प्यारी सी मुस्कान लिए फिरते है  दर्द से भरी है ये दुनिया अब  तभी दर्द से ढकी हुई एक नई …

दर्द से भरी ज़िन्दगी को उनके पहचान दो तुम

दर्द से भरी ज़िन्दगी को उनके पहचान दो तुम अपनी सुख को कम करके उनका हाथ थाम दो तुम रब की ख्वाहिसे है बस की उनका नूर बरसे सब …

कोई मतवाला मस्त हुआ बिन पंख हवा में उड़ने से

कोई मतवाला मस्त हुआ बिन पंख हवा में उड़ने से उड़ उड़ के वो नभ को नापा फिर किया प्रफुल्लित मुड़ने से लोगों की भाव लटक गई अब आसमान …

पर रब के पाने का रास्ता वे भूल गये है ….

अमीर अपनी अमीरी के मायने भूल गये है राह पे चलते मुशफ़िर अपनी राहे भूल गये है बड़े बड़े नेताओं ने किये थे लम्बे चौड़े वादे नेता बनने के …

नारी के प्रति मानव के कर्तब्य और फ़र्ज़ …

नारी के प्रति मानव के कर्तब्य और फ़र्ज़ … ************************************ हर चीज़ यहाँ पे बिखरी है,दिखती है लोगो को सिर्फ अपनी अपनी जिन लोगों को पता है सब , …

गम की आह जलाती है ,हमको अंदर ही अन्दर

गम की आह जलाती है ,हमको अंदर ही अन्दर क्यों अपंग बनाया रब ने उनको , कितने अच्छे थे वो पहले इस ह्रदय विदारक घटना से हम दुःख होते …

भूल न सके उनके दर्द को हम , जो उस दिन अपनी नज़रों से हमने देखा

परदे के पीछे छिपे किसी का दर्द झलकते देखा वो हस तो रहे थे ऊपर से मगर उनके मासूमियत भरी आँखों से आंसू गिरते देखा हम स्तब्ध रह गए …

हम मायूस ना हो कभी ये सोच के वे सब कुछ करते जा रहे है

अपने पितृजनों के इल्तिफ़ात से हम आज आगे बढते जा रहे है हम मायूस ना हो कभी ये सोच के वे सब कुछ करते जा रहे है जो कुछ …

छोटे छोटे बच्चे को क्या जीने का अधिकार नहीं

छोटे छोटे बच्चे को क्या जीने का अधिकार नहीं बिन शोषण के आगे बढने का क्या उनको अधिकार नहीं हम सबने जन्म लिया है बिन भेद भाव के यहाँ …

दर्द गरीबों का लफ्जों में बयां नहीं कर सकते ..

दर्द गरीबों का लफ्जों में बयां नहीं कर सकते .. कैसे जीते है वो हर पल यहाँ , कथनों में बयां नहीं कर सकते ना ही जागरूकता है यहाँ …

बिन पथ के चलने का ख्वाब हमने देखा

पहली पहली बार में जीतने का ख्वाब हमने देखा बिन पथ के चलने का ख्वाब हमने देखा साथ चलने को तो है सब तैयार थे अपने पर अकेले चलने …

नन्हे नन्हे हाथों से तारों को छूने चलती थी

छोटी सी वो बच्ची थी हर पल मुझसे लड़ती थी नन्हे नन्हे हाथों से तारों को छूने चलती थी छोटी सी आँखें थी उसकी जिससे सबको देखा करती थी …

जो होना है उसकी फ़िक्र न करो बस कर्म के धागे को टूटने न दो ..

उम्मीदें इन्शान को जीना सिखाती है उम्मीद का दामन, छूटने न दो …. जो होना है उसकी फ़िक्र न करो बस कर्म के धागे को टूटने न दो .. …

ज्योत्स्ना में खुद की परछाई देख कुछ पल उसमे खो जाना कुछ अदभुत सा लगता है

चलते चलते ठोकर खाना , ठोकर खाके यूँ गिर जाना सब कुछ अदभुत सा लगता है ज्योत्स्ना में खुद की परछाई देख कुछ पल उसमे खो जाना कुछ अदभुत …

ज़ुबा पे नाम किसी और का था , दिलों में कोई और छिपा था

ज़ुबा पे नाम किसी और का था , दिलों में कोई और छिपा था आँखें किसी को प्रत्यक्ष: देख तो रही थी पर नज़रों में कोई और बसा था …

चिड़ियों का चहचहाना अब अच्छा लगता है …

चिड़ियों का चहचहाना अब अच्छा लगता है … कल के ख्वाबों में डूब जाना अब अच्छा लगता है … कल तक जिस रास्ते से हम दूर भागते थे आज …

दिल के अरमानों को दिल में दफ़न होने मत दो …

दिल के अरमानों को दिल में दफ़न होने मत दो … जो संकल्प ली है आपने उसे बीच में ही विखंडित होने मत दो .. आपके माँ बाप ने …

सत्कर्म करते हुए मर जाने की तमन्ना है मेरी …

एक आदर्श के रूप में लोगों के दिलों में बसने की तमन्ना है मेरी …. सत्कर्म करते हुए मर जाने की तमन्ना है मेरी … नफरतें तो बस इन्शान …