Category: शिशिर कुमार गोयल

धरती का फेरा – शिशिर मधुकर ( बिना रदीफ की ग़ज़ल )

मुहब्बत तूने दी मुझको तभी मैं हो गया तेरा तू आई मेरी बाहों में मिट गया सारा अँधेरा जब से सूरज हुआ मद्धिम बशर देखा नहीं कोई मगर उम्मीद …

मुकद्दर का सिकंदर – शिशिर मधुकर

जो तेरे हुस्न का, बस एक यहाँ, दीदार हो जाए हर एक इंसान को, केवल तुझी से, प्यार हो जाए मुकद्दर का सिकंदर, दिल की दुनिया, में बनेगा वो …

नेह की धारा – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ जी ग़ज़ल )

मुहब्बत हो गई तुमसे, करे क्या, दिल ये बेचारा तन्हा बैठा है यादों में, मगर हिम्मत, नहीं हारा आस तो अब भी, जिंदा है, इस जीवन के, मेले में …

जुदाई तुमको भाती है – शिशिर मधुकर

ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते हो मैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते हो दर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां …

रात तन्हाई की – शिशिर मधुकर

चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा है नज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो,आखिर, उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होता मगर इस वक्त …

किस्मत के धोखे – शिशिर मधुकर

किस्मत के धोखे,ज़िन्दगी में, जब भी आते हैं कुछ भी करो, दिल को मगर, वो तो दुखाते हैं कभी सोचा ना था, यूँ ज़िन्दगी भी, रूठ जाएगी कुछ अपने …

साथ और विश्वास – शिशिर मधुकर

अगर तूने मुझे आगोश में अपने लिया होता तेरी आँखों का जाम झूम कर मैंने पिया होता काश तुम माँग लेते हाथ मेरा चल पड़े थे जब मैंने सब …

पास आते तुम – शिशिर मधुकर

कमी तुम को अगर महसूस होती पास आते तुम यूँ ही रूठे ना रहते मुस्कान दे मुझको मनाते तुम लम्बी राहें मुहब्बत की कभी आसां ना होती हैं जलजलों …

रब ही लिखता है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिससे हो जाए खुदा बस उसमें दिखता है बनाने से बना हैं कब ये रिश्ता रब ही लिखता है खरीदा हैं जहाँ उसने मगर ना प्रीत मिल पाई …

अंदाज़ ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

सब कुछ लुटा के प्यार से मुझको ही लूटा है अंदाज़ ए मुहब्बत ये तेरा बिल्कुल अनूठा है शीशा ए दिल में पहले तो तेरी एक छवि थी छवियां …