Category: शिशिर कुमार गोयल

दर्द का रिश्ता – शिशिर मधुकर

झगडे मुहब्बत के तो मुझको मंजूर थे सारे तुम दिल से पर ना हो सके कभी भी हमारे जब दर्द का रिश्ता ना कोई तुमने बनाया है कैसे करूँ …

मिलन का खेल – शिशिर मधुकर

किसी के साथ में रहते ये ज़माने गुजर गए किसी की धड़कनो में हम पल में उतर गए बड़े अरमानों के संग जिंदगी सौंपी थी हमने आशियाँ सपनो के …

समय आजमाता है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत क्या हुई तुमसे भूल बैठे जहाँ को हम तुम्हारे बिन तुम ही कह दो जाएं कहाँ को हम जुड़े हैं तुमसे कुछ ऐसे सारे तार इस दिल के …

आहत – शिशिर मधुकर

किसी के माँगने से तो यहाँ चाहत नहीं मिलती मुहब्बत ढूंढ़ने वालों को भी राहत नहीं मिलती करम सब पे हो उसका ये ज़रूरी नहीं है दोस्त ज़माने में …

दर्द छलक जाता है -शिशिर मधुकर

अपनों से मिलता हूँ तो आनंद मुझे आता है जिसके मन में हो प्रेम वही रिश्ते निभाता है अपनों के कारण ही ये दिल टूटता है जिनका हर बात …

नफ़रत का अँधेरा – शिशिर मधुकर

जीवन में ये मुकाम जाने कैसा आ गया नफ़रत का अँधेरा मेरे हर ओर छा गया जिससे भी मैंने यहाँ फूलों की आस की हर आदमी मुझको एक नश्तर …

मन का नाता – शिशिर मधुकर

वो पूछते हैं मुझसे खयालों में कौन आता है उन्हें कैसे मैं बताऊँ किस से मन का नाता है कुछ रिश्तों के जीवन में कभी नाम नहीं होते मगर …

खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है (2)- शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है करती मेहरबानियां हरदम ज़िन्दगी रूठ जाती है अगर हों तन्हाईयां हरदम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी फिर भी रहती …

गुजरे लम्हे – शिशिर मधुकर

मेरे नगमों को वो पढ़ते हैं तो घबरा से जाते हैं गुजरे लम्हे कई लफ्जों में पा शरमा से जाते हैं सम्भल के सोचते है जब उमंगे मन में …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है सभी को चाहिए हरदम ज़िंदगी रुठ जाती है अगर हो जाती है ये कम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी …

खुद को हार कर देखो – शिशिर मधुकर

किसी को जीतना है तो खुद को हार कर देखो किसी के बिगड़े कामो को तुम संवार कर देखो ख़ुदा को यूँ ही नहीं इंसान यहाँ याद करता है …

फूल झरते रहें – शिशिर मधुकर

तुम हँसते रहो फूल झरते रहें मुहब्बत हम तुम से करते रहें व्यापार जीवन समझते हैं जो ना होगा वहाँ रिश्तों का चमन उल्फ़त जिसे ना हुई हो कभी …

हर पल सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम सजते संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से कितना प्यार करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

मेरी नाराज़गी – शिशिर मधुकर

मेरी नाराज़गी को तुम नहीं जब मोल देती हो निष्ठुर सी बन कड़वी बातें सारी बोल देती हो वो पल मुझे इस जीवन में ये महसूस कराते हैं मानो …

श्रद्धा – शिशिर मधुकर

श्रद्धा अगर सच्ची है तो कभी होंगी ना दूरियां बिन कहे समझेगा कोई तब सकल मजबूरियां रुकमनी लड़ती रही और वो ना कभी दे सकी राधा और मीरा से …

सदगुण – शिशिर मधुकर

अधिक पाने की इच्छाओं को पूरा त्यागना होगा वरना चिंता रहेगी मन में और नित भागना होगा बिन प्रेम के जीवन में सब इच्छाएं तनाव ही देंगी चेहरों का …

प्रेम का अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं अजनबी लोगों के साथ घर में रहता हूँ बोझिल हुए रिश्तों के सारे बोझ सहता हूँ हर अंग चोटिल है मेरा अपनों के तीरों से दिल की पीर …

मुक़ाम ए बन्दगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत की झलक देखी पर ना देखी है दीवानगी तूफ़ान में वो डगमगा गए उनसे उम्मीदें जब जगीं उनकी तस्वीर दिल दिमाग में कुछ ऐसी बस गई लाख चाहा …

किस्मत का सितम – शिशिर मधुकर

मुझे इस वक्त ने तन्हाई का जो मंज़र दिखाया है कोई राज़ यूँ लगता है इसके दिल में समाया है सोच कर खान हीरों की मैंने दोनों मुट्ठी भरी …

होली मनाते -शिशिर मधुकर

जिन्दगी में काश ऐसे हसीन लम्हे भी आते तुझे आगोश में ले गालों पर हम रंग लगाते तुझे बस प्रेम कर हाथों से तेरा श्रॄंगार करते कुछ इस तरह …

होली – शिशिर मधुकर

खुशियों का त्योहार है होली रस प्रेम का चहुं दिस बरसे मेरे साजन हैं दूर देश में प्यासा जियरा मिलन को तरसे लाख बताए मुझे कोई उनके ना आ …