Category: शिशिर कुमार गोयल

मुहब्बत जो मिली होती – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जो मिली होती हाल ए दिल ये नहीं होता तंहाइयो में यूँ ग़मज़दा हो के फिर मैं भी नहीं रोता कोई रास्ता मिलता मुझे जो सहरा में सम्भलने …

क्यूँ अपनी जां निसार करता है- शिशिर मधुकर

बड़ा दर्द होता है जब कोई शब्दों से वार करता है तेरे मेरे स्नेह का एक ओछा सा तिरस्कार करता है जो इंसान की वक़त को निपट रुपयों से …

भेद सारे ख़त्म हुए – शिशिर मधुकर

मुहब्बतें तुमसे मेरी जान कम नहीं होंगी चाहे साँसें मेरी ये धीमे से थम रही होंगी बदलती ऋतु में सबका मिजाज बदलेगा बहती नदियां भी पर्वतों में जम रही …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगा तेरा साथ है एक दिन छूट जाएगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगा वक़्त है आज गुजर जाएगा तू आज साथ है मै बड़ा …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दो कुछ अपना सा हो जाने दो तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो एक बस मकसद है , पूरा हो जाने …

मेरा धाम हो गया – शिशिर मधुकर

अपने हाथों मेरे जीवन में ही ये काम हो गया गलत राहों पे चल तन्हा मैं सरे शाम हो गया चलेगी ज़िन्दगी गतिमान हो सोचा था ये मैंने चले …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारा साथ था तो खुशियों की बरसात होतो थी सितारों के बिना भी कितनी सुहानी रात होती थी अगर तुम रूठ जाते थे तो हम झुक कर मनाते थे …

इक खेल है सारा – शिशिर मधुकर

जिंदगी कुछ नहीं किस्मत का बस इक खेल है सारा खुशी कुछ भी नहीं बस रूहों का पावन मेल है सारा लाख कोशिश करे कोई यहाँ कि इसकी डोर …

हरदम बुलाता है – शिशिर मधुकर

इस जिंदगी में दिल के जो नज़दीक आता है अचानक ही उसका दूर जाना मन दुखाता है ग़म को छुपाए सीने में कोई मुँह से नहीं बोले सुकून देने …

असली रंग – शिशिर मधुकर

समय के साथ लोग अपने असली रंग दिखाते हैं मेरी बज़्म में खुद आने वाले अब नज़रें चुराते है ना कोई पाप था दिल में ना कोई स्वार्थ भारी …

अब तक क्यों ना ठानी है – शिशिर मधुकर

जब भी मेरी भारत माता का कोई लाल बलि चढ़ जाता है कायरता का रोना धोना अपने अखबारों में छप जाता है दुर्दांत पड़ोसी से सभ्य व्यवहार की आकांक्षाएँ …

ऐसा भी होता है – शिशिर मधुकर

किसी के पास रहने से मुहब्बत हो नहीं सकती महज़ कुछ दूर जाने से कभी ये खो नहीं सकती दर्द इसमें जुदाई का देखो मगर ऐसा भी होता है …

काले धन की धवल शक्ति -शिशिर मधुकर

भारत की स्कूली शिक्षा में देखो ये कैसा घोटाला है फक्कड़ और पैसे वालों ने मध्य वर्ग को धो डाला है सरकारी स्कूलों पर तो अब भूखे नंगो का …

बदलता वक्त – शिशिर मधुकर

बदलता वक्त है अब उल्फत का कोई दाम नहीं फकत प्यार की बातों से तो मिलता आराम नहीं इस जज़्बात में जो अपनी ज़िंदगी का नास करें ऐसे मूरख …

आस – शिशिर मधुकर

हवाएं नहीं चलती तेरी खुशबू हो जिनके पास बहारे फिर से आएँगी नहीं देता है कोई आस साँसें चल रही हैं यूँ तो जिम्मेदारी निभाने को चाहत बिना ये …

बस राज़ है इतना – शिशिर मधुकर

मुझे अपनी मुहब्बत पे सुनो जी नाज़ है इतना बनाया जिसने जानेमन हसी तुम्हें आज है इतना दीवाना हसीनॉ का तो मैं पहले भी होता था मगर तुमको सराहे …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारे साथ में हर दिन आसानी से कट जाता है सुख दुःख जीवन के सब सहने में मज़ा आता है मतलबी रिश्तों के लिए मगर संग मैंने छोड़ दिया …

फूलों से सजाऊँगा – शिशिर मधुकर

आईना देखो तो मैं तुमको नज़र आऊँगा बिजलियां प्यार की तेरे हुस्न पे गिराऊँगा भले ना बात करो तुम ज़माने भर से डरो तेरे ख्वाबों में मैं झुक कर …

स्नेह सम्मान – शिशिर मधुकर

स्नेह सम्मान जो दिल में हो तो दिख जाता है झूठे चेहरों पे फरेब बड़ा साफ़ नज़र आता है कोई चुपचाप है और तुमसे कुछ नहीं कहता अक्सर मजबूरी …