Category: शिशिर कुमार गोयल

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …

कातिल लुटेरा -शिशिर मधुकर

जिन्हें भी अपने सीने पर मैंने एक गुल सा सजाया था सभी ने मौका पा जहरीला काँटा ही मुझको चुभाया था लाख कोशिश करी मिल जाए मुझको सच्चा हमसफ़र …

माथे का कुमकुम – शिशिर मधुकर

मेरी जिंदगी में सब कुछ छोड़ कर गर जो आते तुम तुम्हारे मरमरी चेहरे की मय पी मैं रहता नशे में गुम बड़ा वीराना रहता है मेरी मुहब्बतों का …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

नूर फिर से लौटा है – शिशिर मधुकर

प्यार ही प्यार था तेरी इन हंसी निगाहों में मैं खुद को भूल गया तूने भरा जो बाहों में जिंदगी में हर ईक चीज तुमको मिल जाए खुशी मिलती …

चालाकी से गहते हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत को भुला दें हम वो हमसे ये कहते हैं दर्द का क्या पता उनको जो ना चोट सहते हैं ईंट गारे का घर भी तोड़ना आसां ना होता …

प्रीत का रंग – शिशिर मधुकर

हाथ छूटे हैं जीवन में मगर बंधन तो नहीं टूटे दूरीयां चाहे हों जैसी ना तुम रूठे ना हम रूठे समय का फेर है सारा इसका क्या करे कोई …

तेरी खुशबू से -शिशिर मधुकर

तेरी खुशबू से हम तुझको यहाँ पहचान ही लेंगे तू आई है हवाओं के रुख से ये भी जान ही लेंगे सरद मौसम ज्यों बीतेगा नरम सी धूप बिखरेगी …

मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी …

काश तुम साथ में होते – शिशिर मधुकर

काश तुम साथ में होते तो जीवन खुशनुमा होता तन्हाई का गहरा दाग़ तब ना कोई बदनुमा होता तेरी उल्फ़त में हर शै को मैं फिर कुर्बान कर देता …

ढलती सी शाम – शिशिर मधुकर

ऐ दुनियाँ वालों तुमको यहाँ ना कोई काम है प्रेम को रुस्वा कर ही तुम्हें मिलता आराम है तुम क्यों ना समझते हो यही ईश्वर का रूप है हर …

जीवन्त मूरत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहूँ तुम मेरी कितनी ज़रूरत हो मुझे सुख चैन देने वाली एक भोली सूरत हो हर अंग में जिसके छवि दिखती है बस मेरी प्रेम के रंगो …

नालों में बहते हैं – शिशिर मधुकर

फूल जो खुशबू देते हैं अक्सर कांटों में रहते है सच्चे इंसा भी ज़माने में बस कष्टों को सहते हैं वक्त जब साथ ना दे तो आखिर क्या करे …

नाम जब चाहा – शिशिर मधुकर

मैंने नाम जब चाहा तो फिर मैं प्यार को भूला नफे नुकसान की बातों में बस मन मेरा झूला बड़े महलों में भी अक्सर अकेले लोग रहते हैं जिसने …

तेरे अल्फाज – शिशिर मधुकर

तेरे अल्फाज सुनने को मैं ज्यों बेताब रहता हूँ निज मन की ये बात लो खुलकर के कहता हूँ तुम्हारे मान वर्धन से मुझको संतोष मिलता है खुशी के …

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

पाक ज्वाला – शिशिर मधुकर

तुम दावा करो कुछ भी सत्य चेहरे पे दिखता है मुहब्बत की दुनियाँ में क्या कभी झूठ बिकता है दिल में ना सुलगती हो जो नेह की पाक ज्वाला …

प्रतिघात – शिशिर मधुकर

जिसका दिल ही ना हों साफ उससे बात क्या करें करता हों जो बस प्रतिघात उसपे विश्वास क्या धरें इतने मलिन चेहरों से मेरा तो हरदम सामना हुआ आखिर …

प्रेम की धवल धार – शिशिर मधुकर

माना डगर मुश्किल है तुम साथ ना छोड़ो मुसीबत के सहचरो के दिलों को ना तोडो प्रेम की धवल धार कहीँ जाए ना पूरी सूख स्नेह के मेघों के …