Category: शिशिर कुमार गोयल

गौ ह्त्या – शिशिर मधुकर

गौ हत्या पर आजकल चर्चाऐं और सवाल हैं मैं तुमको सुनाता हूँ मेरे अपने जो ख़याल हैं जब हर समय मिलजुल के हमको संग रहना है एक दूसरे की …

कसूर इस दिल का है सारा – शिशिर मधुकर

क्या करूँ अपनी हालत का कसूर इस दिल का है सारा मुझे कैदी बनाने का हुनर तो तिल का है सारा मैं तो नदिया का पानी हूँ मचलना मेरी …

मंजिल बुलाती है – शिशिर मधुकर

तड़प ख़त्म होती नहीं कोई मंजिल बुलाती है किसकी तमन्ना आखिर मुझे हरदम सताती है जब तक मिलन होगा ना पूर्ण तरसूंगा मैं यूँ ही बिछडी हुई कोई रूह …

फूलों की बहार – शिशिर मधुकर

ज़िन्दगी बस जिनके लिए व्यापार है उनको यहाँ मिलता ना कभी प्यार है आपस में दिल की जब ख़बर ना लगे उस घर में फिर रहती सदा तकरार है …

लो अब छोड़ दिया – शिशिर मधुकर

तुमको मनाना हमने लो अब छोड़ दिया ख्वाबों में चले आना लो अब छोड़ दिया तेरी तंहाइया बस तुझको ही मुबारक हों हमने ये दिल दुखाना लो अब छोड़ …

आओ बहस करें – शिशिर मधुकर

बेसुरा बिहार का बैजू बन गया आओ बहस करें व्यापम से फर्जी डाक्टर बन गए आओ बहस करें मेघा को दुत्कार मिल रही आओ बहस करें सामाजिक न्याय की …

जो साथ सच्चा है – शिशिर मधुकर

मिले कुछ ना ज़माने में मगर जो साथ सच्चा है मेहरबान है खुदा तुम पे कि मददगार अच्छा है घृणा मन में पाले कोई जब हरदम संग रहता है …

दिखता शिवाला है – शिशिर मधुकर

तुम्हें मैंने सम्भाला है मुझे तुमने सम्भाला है एक दूसरे के दुःखों का भी हल निकाला है पापी लोगों को प्रेम में व्याभिचार दिखता है साधुओं को इसमें मगर …

दिलों में नहीं दूरी – शिशिर मधुकर

मुझे तुमसे नहीं शिकवा समझता हूँ मैं मजबूरी हूँ चाहे दूर नज़रों से फिर भी दिलों में नहीं दूरी यह जीवन तो औरों के लिए भी जीना पड़ता है …

तन्हा बेचारा – शिशिर मधुकर

मुझे छेड़ा ना गैरों ने फ़कत अपनों ने मारा है सारी उम्र गुजरी है मगर दिल तन्हा बेचारा है मोह ममता के रिश्तों ने मुझे भी बाँध रखा है …

चुनी जब राह मंजिल की – शिशिर मधुकर

चुनी जब राह मंजिल की तनिक सोचा नहीं मैंने लम्बे रस्ते में कपटी लोग लूट लेते है सभी गहने पिटा बैठा हूँ अब सब कुछ गँवा के कारवां से …

जो अंतःकरण में ठान लेता है – शिशिर मधुकर

कोई जब दिल की गहराई से तुमको मान लेता है मुहब्बत क्या बला है अच्छी तरह वो जान लेता है लाख कोशिश करे फिर कोई दूजा साथ पाने की …

बस एक दाल रोटी का सवाल है – शिशिर मधुकर

बच्चे से मैं प्रौढ़ हो गया जाना जीवन जंजाल है इंसानी फितरत में देखा बस एक दाल रोटी का सवाल है कोई भी चैनल खोलो तो बेमतलब के सुर …

स्नेह का मरहम – शिशिर मधुकर

दिल के हाथों बहुत सह लिया अब दिमाग से जीयेंगे जैसे के संग तैसा करके अब विष के आँसू ना पीयेंगे जब कोई पास नहीं है जो मुझको स्नेह …

मिलन बेहद ज़रूरी है – शिशिर मधुकर

तेरे बिन कलम चलती नहीं कविता अधूरी है तेरी खामोशी कुछ ऐसी है ये होती ना पूरी है प्रकृति बिन पुरुष बिखरा हुआ बेचैन रहता है उसको आधार देने …

बात छोटी सी – शिशिर मधुकर

जब तकरार में अधिकार हो ना हो परायापन बातें बुरी लगती नहीं तब लगता है केवल मन जिनको समझ आ जाती है ये बात छोटी सी रिश्तों का असली …

आँखें नहीं रोईं – शिशिर मधुकर

मुझको ना थी दरकार एक तेरे सिवा कोई तेरे बिन तन्हा रातों में मेरी नींदें भी हैं खोईं सबको कह सकता नहीं ये ग़म भी ऐसा है दिल दुखता …

कहाँ मुस्कान आएगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस जगह ना हो कहाँ मुस्कान आएगी घृणा की आग एक दिन पूरे घर को ही जलाएगी लाख कोशिश करो महके ये गुलिस्ता ए जिन्दगी काग़ज़ के फूलों …

कितने अजीब – शिशिर मधुकर

कितने अजीब इस ज़िन्दगी के ये खेल हैं सारे इंसानी बस्तियों में रिश्ते भी बड़े बेमेल है सारे जिन्हें अपना समझ हम सभी को छोड़ देते हैं अक्सर वो …

एहसास – शिशिर मधुकर

जहाँ गुलाब हों कांटों का तो वास होता है शैतान भी अक्सर खुशबू के साथ सोता है केवल फूल ही ईश्वर के मुकुट में सजते हैं शूलों को क्यूँ …