Category: शिशिर कुमार गोयल

लम्हें भी ठहरे हैं – शिशिर मधुकर

तेरी एक दीद को हम तो यहाँ कब से तरसते हैं वो बादल गड़गड़ाते हैं मगर फिर ना बरसते हैं उनको मालूम है हाथों में उनके बस करिश्में हैं …

तिनकों से ढहते हैं – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिनसे है मुझको वो हरदम दूर रहते हैं तन्हा तड़पाते हैं मुझको खुद भी तो पीर सहते हैं एक दिन जान ले जाएगी ये दूरी जो बैरन हैं …

हम ना थकते है – शिशिर मधुकर

राहों में जिन पे तुम मिले उन पे भटकते हैं मुद्दत हुई तुम्हें ढूंढते पर हम ना थकते है अमवां पे बौर आ गया पुरवाई जब चली फल मगर …

प्रीत के फेरे – शिशिर मधुकर

तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरे दूरियां अब कभी हमको परेशां कर न पाएंगी हवाएं …

प्रेम चाहे पलों का हो- शिशिर मधुकर

वो तो परियों की रानी थी रूप उसका सलोना था किसी भी हाल में लेकिन उसे मेरा ना होना था मुझे मिलती थी वो जब भी सदा कुछ कहना …

प्रेम का रिश्ता – शिशिर मधुकर

मुझको मालूम है तन्हाइयों में तू भी रोता है तेरा ग़म दूर रह कर भी मुझे महसूस होता है ज़िन्दगी क्या करें अच्छे बुरे रिश्तों का बंधन है मुहब्बत …

प्रीत छलक जाती है- शिशिर मधुकर

मैं कितना भी छिपाऊं पर, प्रीत छलक जाती है तन्हाइयों में हर पल बस एक, याद तेरी आती है मैं सोचती हूँ जब भी, ख्यालों में तुम ही आते …

बिखर जाता है पर्वत भी- शिशिर मधुकर

जिसका मौक़ा लगा उसने मुझे जी भर के लूटा है बिखर जाता है पर्वत भी अगर भीतर से टूटा है बड़ी कोशिश करी मैंने सफर में तल्खियां ना हों …

असर होता है कुछ ऐसा – शिशिर मधुकर

ना तेरे बोल सुनता हूँ ना ही खुशबू अब आती है तेरी आँखों की वो मस्ती मुझे हरदम सताती है हया से नज़रों का झुकना और फिर मुस्कुरा देना …

अमृत ही मिल गया -शिशिर मधुकर

देखा तेरी निगाह ने गुलशन भी खिल गया ऐसा लगा प्यासे को ज्यूँ अमृत ही मिल गया इस प्यार और विश्वास की ताकत अजीब है आहें भरी मैंने तो …

तभी संजोग बनते हैं – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी मुझको मगर ना चैन आता है कोई ख़्वाबों में आकर रात भर मुझको सताता है ज़माना बन गया दुश्मन कहीं जीने नहीं देता ख्यालों में सदा …

असल मस्तानगी ना थी-शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे उसे दीवानगी ना थी ये तो किस्मत की बातें हैं मुझे हैरानगी ना थी रात भर पूजा करी जिसकी वो नज़दीक ना आया उसे पाने …

चाँदी की पायल – शिशिर मधुकर

हमें तुम क्या सताओगे हम तो वैसे ही घायल हैं वो तेरी सादगी है जिसके हम बरसों से कायल हैं भले ही पैरों में पहनों मगर ये सच तो …

कैसे गिराएं अब दीवारों को -शिशिर मधुकर

कोई तो बात है अदावत है जो हमसे हज़ारों को चाँद को कुछ नहीं होगा जा के कह दो सितारों को जलो कितना भी तुम सूरज ताप अपना दिखाने …

भंवर रिश्तों के – शिशिर मधुकर

ये माना रास्ते मुश्किल हैं और मन उदास है ज़िन्दगी से नहीं शिकवा अगर रहती वो पास है हर तरफ आग बरसे है कहीं बादल नहीं दिखते धरा फिर …

अब नहीं फुरसत – शिशिर मधुकर

तुम्हारे हुस्न के जलवे हमें अब भी सताते हैं हमें पर कुछ नहीं होता ये गैरों को जताते हैं तुम ही सच जानते हो बस गए कैसे निगाहों में …

जाने ये किसका दोष है – शिशिर मधुकर

ढूंढ़ते हैं हम जहाँ पे ज़िन्दगी मिलती नहीं जाने ये किसका दोष है कलियां अब खिलती नहीं पत्तियां इस पेड़ की खामोश हैं मायूस हैं जब हवा ही ना …

तुमने मुझको छांटा था-शिशिर मधुकर

बचपन में ना जाने मुझको कितना तुमने डांटा था गलती मैं जब करता था गालों पर पड़ता चांटा था सबने पूछा जब तुमसे चुन लो एक सुन्दर सा बच्चा …

माँ की गोद बिछौना- शिशिर मधुकर

हर बच्चा अपनी माता की आँखों का नूर सलौना है उसके प्रेम के आगे जग का हर स्नेह कितना बौना है कैसी भी पीड़ा हो लेकिन नींद जहाँ आ …

तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं …