Category: शिशिर कुमार गोयल

आस – शिशिर मधुकर

हवाएं नहीं चलती तेरी खुशबू हो जिनके पास बहारे फिर से आएँगी नहीं देता है कोई आस साँसें चल रही हैं यूँ तो जिम्मेदारी निभाने को चाहत बिना ये …

बस राज़ है इतना – शिशिर मधुकर

मुझे अपनी मुहब्बत पे सुनो जी नाज़ है इतना बनाया जिसने जानेमन हसी तुम्हें आज है इतना दीवाना हसीनॉ का तो मैं पहले भी होता था मगर तुमको सराहे …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारे साथ में हर दिन आसानी से कट जाता है सुख दुःख जीवन के सब सहने में मज़ा आता है मतलबी रिश्तों के लिए मगर संग मैंने छोड़ दिया …

फूलों से सजाऊँगा – शिशिर मधुकर

आईना देखो तो मैं तुमको नज़र आऊँगा बिजलियां प्यार की तेरे हुस्न पे गिराऊँगा भले ना बात करो तुम ज़माने भर से डरो तेरे ख्वाबों में मैं झुक कर …

स्नेह सम्मान – शिशिर मधुकर

स्नेह सम्मान जो दिल में हो तो दिख जाता है झूठे चेहरों पे फरेब बड़ा साफ़ नज़र आता है कोई चुपचाप है और तुमसे कुछ नहीं कहता अक्सर मजबूरी …

तू कितनी गजाला है – शिशिर मधुकर

तुम्हारे रूप को अल्लाह ने जिस साँचे में ढाला है मेरी जान जांन लो इसने ही मेरा दम निकाला है तेरी आँखों को तकता हूँ तो मुझको झील दिखती …

असली चाहत का संसार – शिशिर मधुकर

नहीं है कोई भी शिकवा जानता हूँ मैं मजबूरी एक घर बनाने में गुज़र जाती है ये उमर पूरी असली चाहत का संसार तो दिल में बसता है दिखाएं …

वर्षा भादों की – शिशिर मधुकर

घुमड़ घुमड़ के आती हैं घटाएँ तेरी यादों की गिरा जाती हैं जो बिजली सारे टूटे वादों की मैं जन्मों से प्यासा हूँ नहीं ये प्यास बुझती है कोई …

स्नेह धागा – शिशिर मधुकर

सुन बात धोबी की प्रभु ने सिय को त्यागा था माता के जीवन में ये पल कितना अभागा था मुश्किलें कितनी भी आईं वो नैहर नहीं लौटी प्रभु सम्मान …

शिव कहाता है – शिशिर मधुकर

मेरा अपमान करने वाले तू ये भूल जाता है इज्जत उतारने का गुर मुझको भी आता है मगर बिष को ग्रहण करना आसां नहीं होता इसको पी लेने वाला …

मेरे दुश्मन – शिशिर मधुकर

मेरे दुश्मन मैं तुझको ये साफ़ पैग़ाम देता हूँ तेरी हरकत के कारण ही तुझे ये नाम देता हूँ तुझसे निपटने के मुझ पे भी इंतज़ाम हैं सारे मगर …

मशीनों से बनो – शिशिर मधुकर

मशीनी युग में जीते हो मशीनों से बनो तुम भी कमानों से वो चलती हैं कमानों से चलो तुम भी मशीनें दिल नहीं रखतीं वो चलती हैं या रुकती …

भोर भी होगी – शिशिर मधुकर

घायल है मेरा मन किसे दिखलाऊँ चोटों को मैं सारी उम्र तरसा हूँ प्रेम के प्यासे होठों को अपना समझ के मैंने जिसे घर में बसाया था मेरे सम्मान …

सर झुका लिया – शिशिर मधुकर

संयम का नया सोपान देखो हमने पा लिया तुम सामने खड़े थे फिर भी मुँह घुमा लिया कच्ची नहीँ है प्रीत जो बारिशों में टूट जाएगी यादों में जल …

ज़माना कहता है – शिशिर मधुकर

तुम्हे देखा है सुबह शाम ज़माना कहता है तेरी खातिर हुआ बदनाम ज़माना कहता है बड़ा काबिल था मैं एक दिन सबकी निगाहों में मगर मुझको नहीं अब काम …

रात की खामोशियां – शिशिर मधुकर

गुजर रहा है वक्त यादें धुंधली पड़ रही है तन्हाई की ज़ंजीरें फिर से जकड़ रही हैं रोशनी अब तो नज़र आती नहीं कहीं से रात की खामोशियां मुझको …