Category: शिशिर कुमार गोयल

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …

प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

बेफिक्र सा – शिशिर मधुकर

तुम मुस्काते हो तो मुझको पता चल जाता है मेरा ख़याल अकेले में अब भी तुम्हे सताता है लाख कोशिश करूँ मैं बेफिक्र सा दिखाने की तेरी चाहत का …

तेरी यादों के सहारे – शिशिर मधुकर

तुझ से बात ना हो तेरी तस्वीर देख लेता हूँ कुछ इस तरह ही निज मन को सुकूँ देता हूँ बड़ी दूर हैं किनारे और लहरें भी मचलती हैं …

एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था तुम्हारा …

पीर का पानी – शिशिर मधुकर

यूँ ही नहीं मैं तुमको नित एक संदेशा भेजता हूँ तेरी आँखों के दर्पण में खुद की छवि देखता हूँ इस दर्पण पे कहीं धूल का गुबार जम ना …

शिकवे गिले – शिशिर मधुकर

शिकवे गिले मुझे तुझसे बहुत हैं ऐ ज़िन्दगानी मेरी कुछ तो बता दे मेरे लिए आखिर क्या मंशा है तेरी जिसके लिए भी मैंने सब कुछ दाँव पर लगा …

मुझको भी थाम ले -शिशिर मधुकर

ज्यों थामा था मैंने तुमको कोई मुझको भी थाम ले धड़कनों में बसा ले अपनी रात दिन मेरा ही नाम ले बड़ी किस्मत से यहाँ मिलते हैं ऐसे साथी …

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …