Category: शिशिर कुमार गोयल

तेरे अल्फाज – शिशिर मधुकर

तेरे अल्फाज सुनने को मैं ज्यों बेताब रहता हूँ निज मन की ये बात लो खुलकर के कहता हूँ तुम्हारे मान वर्धन से मुझको संतोष मिलता है खुशी के …

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

पाक ज्वाला – शिशिर मधुकर

तुम दावा करो कुछ भी सत्य चेहरे पे दिखता है मुहब्बत की दुनियाँ में क्या कभी झूठ बिकता है दिल में ना सुलगती हो जो नेह की पाक ज्वाला …

प्रतिघात – शिशिर मधुकर

जिसका दिल ही ना हों साफ उससे बात क्या करें करता हों जो बस प्रतिघात उसपे विश्वास क्या धरें इतने मलिन चेहरों से मेरा तो हरदम सामना हुआ आखिर …

प्रेम की धवल धार – शिशिर मधुकर

माना डगर मुश्किल है तुम साथ ना छोड़ो मुसीबत के सहचरो के दिलों को ना तोडो प्रेम की धवल धार कहीँ जाए ना पूरी सूख स्नेह के मेघों के …

जनसंख्या वृद्धि (व्यंग) – शिशिर मधुकर

चार बीबी और चालीस बच्चे जनसंख्या वृद्धि के जिम्मेदार है कितना बड़ा झूठ एक नेता नें यहाँ खुल कर फ़िर से कह दिया ज्यादा बीबी और ज्यादा बच्चों से …

जज्बा मुहब्बत का – शिशिर मधुकर

तेरा भरोसा आज भी खुलकर ये कहता है जज्बा मुहब्बत का तेरी रग रग में रहता है इन दुनियाँ वालों नें जब मुँह पर जड़े ताले दिल की बातें …

रंज ओ ग़म – शिशिर मधुकर

मेरा दिल ये करता है मैं तेरे रंज ओ ग़म ले लूँ तुझे बाहों में महफूज़ रखूं तेरे गेसुओ से खेलूं मुझे तेरी मुहब्बत का गर मिल जाएगा अमृत …

महज व्यापार – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जहाँ होती है वहाँ टकरार होती है न इसमें जीत होती है न कभी हार होती है हर पल जो रिश्ते में नफे नुकसान की सोचें उन लोगों …

साफ दिल से – शिशिर मधुकर

साफ दिल से जब कोई यहाँ नज़दीक आता है सपनों में विचरता है और धड़कन में समाता है मिलकर बिछड़ जाता है जब रिश्ता कोई ऐसा इंसान घुट घुट …

कलयुगी कृष्ण – शिशिर मधुकर

कल शाम टी वी देख बड़ा आनन्द आ रहा था मोर पंख धारी लालू सुत बाँसुरी बजा रहा था कलयुगी कृष्ण का लगा अवतार फ़िर हुआ है विवेकी जनों …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

नया साल – शिशिर मधुकर

परिवर्तन की आशायें जब हो जाती हैं विशाल जान लो आ पहुँचा है द्वार फ़िर एक नया साल आशाओं से जन्मती है उमंग धड़कते दिलों में बनती है जिनसे …

अधूरा – शिशिर मधुकर

तुम्हें कैसे बताऊँ मैं यहाँ कितना अधूरा हूँ झूठे रिश्ते नातों संग कभी होता ना पूरा हूँ प्यार ढ़ूंढ़ा जहाँ मैंने वहाँ व्यापार भारी था तन्हा बैठा हूँ राहों …

हरसिंगार झरते हैं – शिशिर मधुकर

जिन्दगी में जो भी जन तुमसे प्यार करते हैं वो बोलते हैं जब तो बस हरसिंगार झरते हैं मिलते हैं ऐसे लोग गर जीवन में किसी को लाखो रंग …

एहसास – शिशिर मधुकर

मुहब्बत में खुदा तुमको यहाँ जिसने बनाया है अपनी बेरुखी से तुमने उसका दिल दुखाया है ज़रा ठहरो आँख मीँचो और चुपचाप ये सोचो तेरे हर रोये रोये में …

मधुर मुस्कान – शिशिर मधुकर

तुमको मुझ से मुहब्बत है ज़माने भर से ये कह दो तेरी पेशानी को चूमू मैं झुकी नजरों से वो शह दो देख कर जिसको बागो में हजारों फूल …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

जो जगह मुझको दी तूने वहाँ किसको बसाया है मेरी आँखों में तो अब तक तेरा मुखड़ा समाया है मैं जन्मों का प्यासा हूँ तू जीवन दायिनी सुरसरिता अपनी …

पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा बड़ी देर से समझ …

बेमिसाल – शिशिर मधुकर

मैं तो परेशान हूँ कहो तुम्हारा क्या हाल है लम्बी दूरीयों का क्या तुमको भी मलाल है जब साथ में होते हैं कुछ लहरें सी उठती है दर्द बिछड़ने …

उजला सवेरा – शिशिर मधुकर

माना समय मुश्किल है और मुसीबत ने घेरा है हर रात का लेकिन हुआ सदा उजला सवेरा है जो सोचते हैं ये जिन्दगी बस उन पे मेहरबान हैं किसको …