Category: शौर्य शंकर ‘शौर्य’

सुनहरे पंख

कुछ और धुंधले  होते जा रहे है वो रंग, पुरानी यादों के मेरे कुछ ही रंगों का अस्तित्व बचा है बाकी सब सफ़ेद या स्याह से लगते हैं अब तो।   मिटटी के बने …

मेरा मन कुछ दिनों से अकेले शहर घूम आता है

मेरा मन कुछ दिनों से, अकेले शहर घूम आता है ये बावला सा है कुछ , मेरी बात सुनता ही नहीं।   किवाड़ पे दस्तक होते ही, रात की …

जहाँ अभी गोली चली थी

अँधेरे की ऊनी चादर ओढ़े, वो रात भयानक सी है. जहाँ अभी गोली चली थी, जहाँ थोड़ी देर पहले भगदड़ मची थी। एक तरफ, गाड़ियों के टूटे कांच पड़े थे, …