Category: शर्मन

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगा तेरा साथ है एक दिन छूट जाएगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगा वक़्त है आज गुजर जाएगा तू आज साथ है मै बड़ा …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दो कुछ अपना सा हो जाने दो तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो एक बस मकसद है , पूरा हो जाने …

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

काटकर लकड़ियाँ जो रोज बेचता है…

काटकर लकड़ियाँ जो रोज बेचता है वो लकड़हारा भी ख्वाब देखता है   बाँधकर लकड़ियाँ सपने सँजोया उसने हर वक्त, हर मौसम बदन पे झेलता है   बिक जायेंगी …

गाँधी ने अद्वैत को देखा था…

एक विशाल अँधेरे बंद कमरे में लोग एक-एक कर के अपने-अपने हाथ में चिराग लेकर प्रवेश करते रहे… जो गये…लौटकर नहीं आये शहीद कहलाये । और जो बच गये …

मुझे यह कहना है…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

अलविदा ! कहने से पहले मुझे यह कहना है जो देखा है, पाया है अहा ! कितना अनोखा है ज्योतिसागर में देखा शतदलकमल खिला हुआ कर के मधुपान जिसका …

जब नयी-नयी सृष्टि हुई…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

जब नयी-नयी सृष्टि हुई आकाश में तारे विहँस उठे देवताओं ने गीत गाये और सभा में झूम उठे, “अहा ! इस परिपूर्णता में कितना विशुद्ध आनंद है !” तभी …

पुष्पांजलि…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

आज…तूने मृत्युदूत को मेरे द्वार पर भेजा है अज्ञात सागर-पार से जो मेरे लिये सन्देश लाया है रात अँधेरी है और मैं भयभीत हूँ फिर भी दीप हथेली पर …

जाग उठे…चेतना…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

चिरजन्म की वेदना चिरजीवन की साधना ज्वाला बनकर उठे निर्बल जानकर मुझे करो नहीं कृपा…ओ रे भष्म करो…वासना और विलम्ब न करो अमोघ बाण छोड़ दे वक्ष को जकड़े …

पूजा का नैवेद्य…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

वे दिन के ढलते-ढलते मेरे घर में आये और बोले, ‘हम यहीं-कहीं तेरे पास चुपचाप पड़े रहेंगे देवता की अर्चना में तेरी सहायता करेंगे जो प्रसाद…पूजा के उपरान्त मिलेगा …

फिर…एक बार…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

फिर…एक बार सबने मेरे मन को घेर लिया फिर…एक बार मेरी आँखों पर आवरण डाल दिया मैं फिर…एक बार इधर-उधर की बातों में उलझ गया चित्त में आग की …

यही तो तेरा प्रेम है…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

अहा ! यही तो तेरा प्रेम है…ओ मेरे हृदयहरण ! पत्ते-पत्ते से तेरा दिव्य-आलोक झर रहा है स्वर्ण की तरह झर-झर… अलस-मधुर-मेघ, सुगंधित पवन स्फुरित कर रहे…मेरे तन-मन अहा …

जीवन जब नीरस होने लगे…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

जीवन जब नीरस होने लगे करुणा की धार बरसाओ जीवन-माधुर्य जब शेष होने लगे गीत सुधा-रस छलकाओ कर्म…जब दैत्यरूप लेकर आकाश में गरजने लगे मेरे हृदय में…हे नीरवनाथ ! …

मेरे सारे अहंकार को…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

मेरा मस्तक…अपनी चरणधूलि तले झुका दे मेरे सारे अहंकार को आँखों के पानी में डुबा दे मैं करता हूँ अपना ही बखान छलता हूँ खुद को, रचता हूँ स्वांग …

तुम्हारे साथ नित्य विरोध…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

तुम्हारे साथ नित्य विरोध अब सहा नहीं जाता दिन-प्रतिदिन ये ऋण बढ़ता ही जा रहा है न जाने कितने लोग तेरी सभा में आये तुझे प्रणाम किये…चले गये मलिन …

क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

प्रतिदिन हे जीवनस्वामी ! क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा हाथ जोड़कर हे भुवनेश्वर ! क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा तेरे अपार आकाश तले मैं चुपचाप…एकांत में नम्रहृदय, द्रवितनयन लिये …

अनुमति मिल गयी…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

अनुमति मिल गयी मित्रो ! मुझे विदा करो मैं प्रस्थान करने वाला हूँ अंतिम-नमन स्वीकार करो मित्रो ! मुझे विदा करो मैं द्वार की कूंजी वापस करता हूँ घर …

तुझसे मिलने के लिये…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

तुझसे मिलने के लिये मैं अकेला ही निकला था न जाने वह कौन है जो नीरव अंधकार में मेरा पीछा करता रहा उससे बचना तो चाहा लेकिन…बच न पाया …

मुझे जगाकर आज…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

हे नाथ ! मुझे जगाकर आज जाओ ना जाओ ना, करो करुणा की बरसात घने वन की डाली-डाली पे वृष्टि झरे…आषाढ़-मेघ से घनघोर बादल आलस भरे डूबी निद्रा में …

सीमा में असीम तुम …रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

सीमा में असीम तुम बजाओ अपने सुर झलके तेरा प्रकाश मन में मधुर-मधुर वर्ण में…गंध में गीतों के छंद में तेरी लीला से, हे अरूप ! जाग उठे अंतःपुर …

जिस दिन मृत्यु…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

जिस दिन मृत्यु…तेरे द्वार पर आकर खड़ी हो जायेगी उस दिन कौन-सा धन दोगे उसे ? मैं खाली हाथ अपने अतिथि को विदा नहीं करूँगा अपने प्राणों के पंक्षी …

और विलंब न करो…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

तोड़ो…तोड़ो…तोड़ो और विलंब न करो धूल में गिरकर यहीं मिट न जाऊँ कहीं भय है मन में यही फूल तेरी माला में गूँथ पायेगा या नहीं अपने हाथों से …