Category: शरीफ अहमद क़ादरी ‘हसरत’

ठोकरें ज़माने की

ये सज़ा मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की मिल रही हें बस मुझको ठोकरें ज़माने की   फैसला हे ये मेरा मैं तुम्हें भुला दूंगा तुमको भी इजाज़त हे मुझको …

फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे

फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे भूल जाने में जिनको  ज़माने लगे   हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे   कोनसी …

अब तो तुम्हारे इश्क में बीमार हम नहीं

अब तो तुम्हारे इश्क में बीमार हम नहीं उल्फ़त में अब तुम्हारी गिरफ्तार हम नहीं उनकी ख़ुशी की चाह में हमने भी कह दिया लो अब तुम्हारी राह में …

लुटाने उर्दू अदब की खुशबू तुम्हरी बज्मे सुखन में आये

लुटाने उर्दू अदब की खुशबु हम आज बज्मे सुखन में आये सजाके लाये हैं हम ग़ज़ल मैं ख्याल जितने ज़ेहन में आये ख़ुशी भी ग़म भी जफा वफ़ा भी …

दुनिया की अंगूठी के नगीने मे डाल दे

दुनिया  की  अंगूठी के नगीने मे डाल दे मुझको बना के खाक मदीने में डाल दे                   मुश्को गुलाब की तो मुझे आरज़ू …