Category: शम्मी शर्मा

काणा कऊआ (हिमाचली कविता)

अंगणा द्वारे बैठया इक काणा कऊआ लगया फरमाणे अउया अउया | जिगलू री अम्मा अंगणे आई देखी कउए जो गलाई कऊआ कऊआ हुर हुर हुर ना जाणे क्या फरमाउदा …

शहंशाहों की विरासत मालूम पडती वो मंडी

शहंशाहों की विरासत मालूम पड़ती आज वो मंडी होता था अक्सर जहाँ रोज आना जाना | इक रोज हम भी शाही सूट में सज धज कर मंडी जा पहुँचे …

गँगा तो मैली है

संगम घाट मिलन त्रिवेणी का साक्षी गंगा का तो वेग प्रचंड यमुना बहती शीतल शीतल मन की आँखों से झाँको सरस्वती माता लोक कथा; सदियों से चलती आई । …

माँ मेरी , ना तू फ़िक्र करना

माँ मेरी, ना तू फ़िक्र करना बेटे करने रक्षा आँचल की तेरे, है सीमा पर खड़े| सुभद्रा की कलम से,हमने सुनी कहानी है करते रक्षा आँचल की तेरे लालों …

कुछ जिंदगी में हमारी तुम इस तरह आए

कुछ जिंदगी में हमारी तुम इस तरह आये चाहते हुए भी हम खुद को रोक न पाए| है ये तेरा जलवा या कदम हमारे थे लड़खड़ाए || आइने में …

मैं लाचार हूँ , मेरी आत्मा मर चुकी है

मैं लाचार हूँ , मेरी आत्मा मर चुकी है | १. मुझसे क्या कहते हो क्या मैं तुम्हें या तुम मुझे जानते हो ? ..हाँ जानता हूँ | क्या …

मैं ऐसा न था …………जो तुने मुझे बना दिया

१. मैं ऐसा न था जो तुने मुझे बना दिया | २. वाहिद सा , ज़रिया-ए-इज़हार से अनजान जाने ! कब तूने इश्क करना सिखा दिया | मैं ऐसा …

छुटकी

१. छुटकी मुट्की घुटकी नटखट अलबेली छैलछबीली प्यारी सी लागे उसकी अठखेली २. गिलहरी मानो उसकी सहेली नाच नचईया, धिक् ता तईया हर कोने में उसकी छईयाँ ३. सुर …

ये क्यूँ इस कदर ……………….याद करता हूँ

ये क्यूँ इस कदर ………………. जेठ कि चुभती दोपहर में भटकता बरसात से पहले अंधड तूफ़ान में आंखे मलता घनघोर वृष्टि कडकडाती धारा में भय से कपकपाता जाड़े की …

नन्ही सी कली मेरा जीवन …………..बढ़कर नहीं कोई दूजा

नन्ही सी कली मेरा जीवन ……………. १. सबसे पहले माँ ने अपनाया नौ महीने कोख में सुलवाया | २. नव जीवन का अंकुर फूटा माँ की आँखों अश्रु छूटा …

नमन है वतन पे मिटने वालो

नमन है वतन पे मिटने वालो……. १. समंदर कि लहरों पे चलने वालों हिमालय पे बेठे देश के रखवालो नमन है वतन पे मिटने वालो ………. २. होती है …