Category: शम्भुनाथ तिवारी

वक्त जब मेहरबान होता है !

ग़ज़ल ख़ूब दिलकश जहान होता है वक़्त जब मेह्रबान होता है सुबह से शाम तक गुज़रजाना रोज़ इक इम्तिहान होता है आह दिल में मिठास होंठों पर घर अगर …

क्या से क्या न जाने हो गए !

ग़ज़ल लोग क्या से क्या न जाने हो गए आजकल अपने बेगाने हो गए आदमी टुकड़ों में इतने बँट चुका सोचिए कितने घराने हो गए बेसबब ही रहगुजर में …

बहुत है !

ग़ज़ल सोचकर मुझको ये हैरानी बहुत है दुश्मनी अपनों ने ही ठानी बहुत है जानकर मैं अबतलक अनजान-सा हूँ हाँ,उसी ने मुट्ठियाँ तानी बहुत है दे गया है ग़म …

ज़िंदगी का फसाना

ग़ज़ल क्या कहें ज़िंदगी का फ़साना मियाँ कब हुआ है किसी का ज़माना मियाँ रोज़ है इम्तिहाँ आदमी के लिए ये सुब्ह-शाम का आना-जाना मियाँ दर्द जो दोस्तों से …

मुश्किल है !

उलझे धागों को सुलझाना मुश्किल है नफरतवाली आग बुझाना मुश्किल है जिनकी बुनियादें खुदग़र्ज़ी पर होंगी ऐसे रिश्तों का चल पाना मुश्किल है बेहतर है कि खुद को ही …