Category: सत्येन्द्र कात्यायन ‘सत्या’

जश्न-ए-सैफई

जश्न-ए-सैफई जश्न-ए-सैफई मना रहा है वो ज़ख्म ताजा है, जला रहा है वो रोते-बिलखते चेहरे उसको नहीं पसंद ठुमको पें , मस्ती के ठहाके लगा रहा है वो लाखों …

नेता और हमारी पीडाएँ

नेता और हमारी पीडाएँ खंडित होगी स्वर मौलिकता तपस्वी भी तप छोड रहे इस भारत भू पर अब प्रतिपल मानव अपना दम तोड रहें सहता है क्या सहते रहता …

भगवान तूने जुल्म का सैलाब बनाया……….

भगवान तूने जुल्म का सैलाब बनाया इंसान बनाया, मगर क्यूं ये बनाया? न था कभी जमीं पे जब जुल्म का निशां इंसान ने ही फैलाया इसको दिशा-दिशा अपनों को …

किसान, गरीबी और मंहगाई……………..

खेतों की काली मिट्टी मिट्टी को आकार देता किसान क्यारियां बना रहा हाथों में लिए फावड़े से धरती का श्रृंगार कर रहा कहीं लम्बी लम्बी क्यारियां कहीं चैकोर मेढ …

विस्तार…

आँख बंद की , ढूंढने लगा डूबने लगा – गहरे और गहरे कभी रोशनी कभी घुप अंधेरा कभी तेजधारा झरने सरीखी …….. भीगकर और गहरे में उतर जाता नहीं …

तबाही

तबाही तबाह होने से पहले भीतर की चुभन लगी सिमटने गिडगिडाती आत्मा …. परखच्चो सा ढांचा चाहने लगा जिन्दगी मौत सही पर तबाही नहीं टूटते फांसलों के कुछ खण्डहर …

ओ! समय ………

ओ! समय ओ! समय के बदले चेहरे क्रूरता में सना हुआ लडा हर कौम को ओ! दुर्भाग्य के जन्मदाता भीड में तू चीरता चला दरिंदगी की कहानी लिखी तूने …

भले लोगो का इस शहर में……….

भले लोगों का इस शहर में कबसे आना जाना है? सूनी सड़के, टूटी राहें लगता सब विराना है छुप जाते हैं चलते चलते काली परछाई से जो आज तो …