Category: सत्यनारायण शिवराम सिंह

लगती छबि मीत !

लगती छबि मीत मुझे मन भावन। मन चंद चकोर समान लुभावन।। मन प्रीत रिसे सुख पाय सुहावन। अँखियाँ बरसे झिमके जिमि सावन।१। चुपके पहले पिय नैन लड़ावत। फिर नैन …

दीवाली के दोहे

दीवाली के दोहरे धर्म कर्म पुरुषार्थ का, दीवाली शुभ योग । जीवन के उत्कर्ष का, अनुपम नव संयोग ।१। पाकर ठाट कुबेर का, मत इतराओ यार। सीख हमें सिखला …

सदी के नायक

याद कर रहा आज पुनि, बापू तुमको देश। दीन दलित के लिए ही, धरा फकीरी वेश।। धरा फकीरी वेश, जलाये वश्त्र विदेशी। जन मन में भर दिया, आपने मन्त्र …

जीवन का सच

जीवन का सच जीवन का सच स्मृतियों नें अनुभवों के ताने बाने से जीवन को बुना बुनते बुनते कुछ धागे टूटे,  कुछ छूटे, कुछ जीवन में समाहित होकर हमें …

देश की अखंडता

भीषण हिंसा की आग, जल रहा कोक्राझार। समती न आज आग, देखिए असम की।। त्राहि माम त्राहि माम, मचा पूरे देश शोर। देखो दबी राख कैसे, चिनगारी भडकी।। देश …