Category: संतोष कुमार ‘मुरारी’

अंतर्दवंद

अंतर्दवंद आज बहुत बेचैन है, ये मेरा मन बेचारा सोचता है क्या वो पल फिर आयेगा दोबारा ? कल जब एक भिक्षुक हाथ फैलाये मेरे सामने आया मुझे व्यवसायिकता …

कल का भारत भाग्य विधाता

कल का भारत भाग्य-विधाता छप-छप करता पानी में नन्हा गोलू स्कूल है जाता, एक हाथ से बस्ता थामे और दूसरे हाथ से छाता। छोटे-छोटे कदम हैं उसके छोटे हैं …